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@dawriter

दर्द-ए-वेलेंगटाइन

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arn by  
Arun Gaud

सुबह सुबह मोबाइल की मैसेज रिगं बजी, चंदू ने अलसाये हुये रजाई मे से अपना मुँह बहार निकाला और आंखे मसलते हुये मैसेज पढने लगा, वो वेलेंगटाइन वीक का मैसेज था, अशिकी के उत्सव का निमंत्रण, वो उत्सव जिसका इंतजार चंदू एक अर्से से कर रहा था। उस मैसेज को पढकर अचानक चंदू की आंखो मे चमक आ गई उसने नजर केलेण्डर पर घुमायी, आज तो 7 फरवरी है यानी रोज डे। चंदू जल्दी से उठा और सीधा बाथरूम मे घुस गया, और बडी तेजी से जीरो से हीरो बन गया, खुद को आइने मे देखकर थोडा इतराया, और सोचने लगा की दो साल कालेज मे खपाने के बाद भी किसी भी लड़की ने उस जैसे हैंण्सम को अपना बायफ्रेंड क्यो नही बनाया, बेड लक है शायद उन सभी लड़कियो का जिनहोने उसकी गर्लफ्रेड बनने का मौका खो दिया, लेकिन इस वेलेगटाइ डे पर कितनी लडकी उसके लिये पागल होंगी और उसकी गर्लफ्रेड बनेंगी, वैसे वो इतना हैँण्सम नही था जितना आज खुद को समझ रहा था। अपने मन ही मन खूब ऊंची पतंग उडाता हुआ वह घर से बहार निकला, नुक्कड की दुकान से बहुत सारे गुलाब खरीदे और हाथ मे गुलाव के फूलो का गुलदस्ता लिये वो कालेज पहुचा, जहा ल़डकियो की तो कोई कमी नही थी लेकिन कोई भी हाथ खाली नही मिल रहा था, जिनके सपने सजोकर चंदू आया था वो तो पहले की गुलाव ले चुकी थी, और कुछ तो गुलाब लेकर पूरा गुलादस्ता ही बना चुकी थी। उनहे पीछे छोडकर चंदू आगे बढ गया, क्योकी उसे उम्मीद थी की इस मेले मे कोई तो हाथ होगा जो अब तक उसके रोज के लिये खाली होगा। वह काफी देर हाथ मे गुलाब लिये घूमता रहा लेकिन किसी भी लडकी ने उसके गुलाव को कोई भाव नही दिया। चंदू थोडा निराश हुआ और उसके अरमान भी गुलाव की तरङ थोड़ा मुरझाये. लेकिन वो इतनी आसानी से हार नही मानने वाला था।

8 फरवरी प्रपोज डे, चंदू फिर से बनठन कर कालेज पहुंचा की आज तो कोई लड़की जरूर उसे प्रपोज करेगी लेकिन फिर ऐसा नही हुआ, उसे किसी लडकी ने प्रपोज नही किया, और कालेज मे एक लड़की को प्रपोज करने पर अपने जैसे एक प्यार के पंक्षी की धुनाई का मंजर देखकर उसमे किसी लड़की को प्रपोज करने की हिम्मत ही नही हुई। इसलिये अपने अरमानो को सीने मे दबाये हुये उसने वापस घर की राह पकड़ ली।

9 फरवरी चाकलेट डे, नया दिन नया सवेरा, नयी उम्मदो के साथ चंदू फिर बनठन कर जेब मे तरह तरह के चाकलेट भरकर फिर पहुच गया हसीनो के मेले मे, लेकिन किस्मत ने फिर उसका साथ नही दिया, वहा कुछ लड़किया पहले ही दूसरो लड़को से चाकलेट ले चुकी थी कुछ के लिये उनके बायफ्रेंट चाकलेट ला रहे थे तो कुछ पढाकू लडकिया हमेशा की तरह किसी से कुछ भी लेने को तैयार नही थी। वो बडे अरमानो से लायी गयी चाकलेटो को जब किसी ने मुह नही लगाया तो चंदू को दोस्तो ने मिलबाट कर उन्हे ठिकाने लगा दिया, वैसे भी जब कोई काम ना आये तब दोस्त ही काम आते है।

10 फरवरी टेडी डे, चंदू को आजतक ये फण्डा समझ नही आया की लड़किया तो अपना बचपना सालो पीछे छोड़कर जवानी मे कदम रख चुकी है फिर ये टैडी डे किस लिये, ये तो बिना मतलब का दण्ड है लडको पर। लेकिन कोई इस बात का विरोध भी तो नही कर सकता, भईया जब गर्लफ्रेंड पानी है तो ये दण्ड भी भरना ही होगा। इसलिये इन फालतू बातो को भूलकर जेब का दिवाला निकल जाने के बाद भी वो टेडी लिये पहुच गया कालेज फिर से अपनी किस्मत अजमाने के लिए, लेकिन वाह रे, फूटी किस्मत फिर से चंदू को धोखा ही मिला और बेचारा टेडी और अपना मुह लटकाये हुए वापस आ गया।

11 फरवरी प्रोमिस डे, चंदू दुनिया भर की कसमे खाने को आतुर, किसे से प्रोमिस करने की आशा लिये कालेज पहुचा लेकिन फिर वो ही पुरानी कहानी, लडकिया एक नम्बर के झूठे और धोखेबाज लड़को के प्रोमिस को इतने प्यार से एक्सेप्ट कर रही थी और बेचारा सच्चे दिल चंदू की तऱफ कोई देख ही नही रहा था। चंदू को समझ नही आ रहा था की लड़किया ज्यादा शरीफ है या लडके ज्यादा कमीने, जो वो बेचारी सच्चाई को समझ ही नही पा रही है। खैर इस सब से उसे क्या क्योकी लाख जतन के बाद अभी भी ना तो वो सच्चो मे था और ना ही झूठो मे।

12 फरवरी हग डे, चंदू परफ्यूम की पूरी बाटल डालकर शाहरूख खान की तरह दोने बाहे फैलाये लडकियो की राह मे खडा रहा कि कोई तो हसीना उसका हाथ थामे, उसके दिल की धड़कन सुने। लेकिन लगता है इस बिजी शेडयूल मे लडकियो के पास इतना फालतू टाइम नही रहता जो वो चंदू और उसे अरमानो को समझे । आज फिर किसी भी लड़की मे उसे घास नही डाली, हारकर बेचारे को हाथ और मुह नीचे करके वापस घर आना पड़ा।

13 फरवरी किस डे, आज चंदू के लिये वेलेंगटाइन डे से पहले आशिको की जमात मे शामिल होने का आखरी मौका था, उसने दो दो बार ब्रश किया और मुह मे माउथ फ्रेशनर दबाकर पूरी तैयारी के साथ बस एक किस की चाह मन ने लिए फिर से हसीनओ के मेले मे पहुच गया, लेकिन उसके सारे जतन बेकार चले गये और उसे किसी भी लडकी ने मुह नही लगाया। इस बार चंदू निराश हो गया, उसकी सारी उम्मीदे टूट गयी थी।

हारे हुए आदमी का एक ही साथी होती है दारू, बेचारे निराशा के सागर मे डूबे चंदू ने बचे खुचे पाकेटमनी से जैसे तैसे एक बोतल का इंतजाम किया और हाथ मे बातल लिये दीवार के बच्चन स्टाईल मे मंदिर मे पहुच गया। उसने भगवान की मूर्ति को देखा और बोला, आज खुश तो बहुत होगे तुम जो कभी एक्जाम के रिजल्ट वाले दिन के अलावा तुम्हारी सीढिया नही चढा, वो आज इन लडकियो के ठुकराये जाने का दर्द लिये तुम्हारे सामने हाथ फैला रहा है, अगर तुम मे शक्ति है तो मेरे सीने के दर्द-ए-वेलेंगटाइन से राहत दिला दो। चंदू भगवान के सामने अपने दिल का दर्द रखकर इंतजार कर रहा था की अब मंदिर के घंटे बजेंगे और कुछ चमत्कार होगा। लेकिन ना तो घण्टिया वजी और ना ही आसमान मे बिजली चमकी, लेकिन तभी किसी ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा, उसने पलट कर देखा तो वो उसका पुराना दोस्त था जो आजकल एक नेताजी की चमचागिरी करके छुटभैया नेता बन गया था। वो चंदू से बोला इतनी छोटी बात के लिये भगवान को क्यो परेशान करते हो, मेरे साथ चलो, मै तुम्हे गर्लफ्रेंड तो नही दिला सकता लेकिन तुझे तेरे दिल के दर्द से राहत जरुर दिला सकता हूँ। चंदू को अपने दोस्त की बात मे एक नयी किरण नजर आयी और वो उसके साथ वापस घर चल दिया।

14 फरवरी वेलेंगटाइन डे, चंदू तैयार हुआ, उसके दोस्त ने उसे आवाज दी, वो घर से बाहर आया, उसका छुटभैया नेता दोस्त और कुछ और लोग उसका इंतजार कर रहे थे, चंदू को गले मे लाल गमछा डाला और जोर से आवाज लगायी, पाशचात्य संसकृति हाय-हाय, चंदू ने भी उनकी आवाज मे आवाज मिलायी, और वो चल दिये वेलेगटाइन डे का पुतला फूकने और साथ घूम रहे जोडो के जबरजस्ती राखी बंधवाने। बहुत जतन करके भी प्रेमी बनने की नाकामी इस तरह बदला लेते हुए चंदू के चेहरे की उदासी मुस्कुराहट मे बदलने लगी, वो मुस्कुराता हुआ खुद से ही बोला, पता नही इस विरोध से हमारी संसकृति बचेगी या नही लेकिन इतना तो तय हो की मुझे मेरे दर्द-ए-वेलेंगटाईन से राहत जरूर मिल जायेगी,.... बोलो पाश्चात्य संस्कृति मुरदाबाद।

(अरुण गौड़)



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