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@dawriter

तेरा मेरा प्यार....!

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कभी कभी यादो के गुलशन में खिले कुछ फूल इस तरह महका जाते हैं जैसे गर्म रेत पर ठंडी ओस की शबनमी बूँद !!! उस पल सिर्फ आँख बंद करके उस एहसास को जीने की आरजू होती है .........दुनिया के शोर शराबे खून खराबे से दूर........बहुत दूर...........हमेशा के लिए बस खो जाने की तमन्ना होती हैं !!! रोज की तरह समुद्रके किनारे बैठ के बस थोडा खुशी तलाश रहा था, उन लहरों के बीच मे।

पूरे दिन की थकान यूं लहरो मे बहाने की चाहत में घंटों बस लहरों को देखते बैठा रहता हूं मानों जैसे इन लहरों से अपनी यारी सी हो गयी है, वो मेरी और मै लहरो की भाषा समझने लगा हूं। पता नही यूं घंटों लहरों से आंखों-आंखों मे बाते हो जाती है बीना कुछ जताये बीना कुछ बताये सारे ग़म पता नही कहाँ गुम हो जाते है ॥

वो वक्त और वो पंक्षी बहुत बेवफा से लगते है जो उन पलों मे हम दोनों के बिछडने का संकेत दे देती है। जैसे मानों की दो प्रेमियों को अलग कर रहे हो, मै उठकर लहरों से विदा लेना चाहता हूं तो वो अपने लहर रुपी आंसुऒ से मेरे पैरो को भिगो के मानो कहती है, "न जा यूं मेरे दिल की धडकनो को बढाकर कही इस समुद्र मे सैलाब ना आ जाये। फिर रहेंगे हम और तुम एक दूसरे के बाहों के आगोश मे, और ये दुनिया फिर तारतार ना हो जाये ॥"

फिर मै उसके आंसुओ को पोछतें हुये उससे बोला।

"ना कर साबित तु यूं खुद को इतना छोटासब को तारतार करके, एक दिन मै ही आ जाउंगा तेरे आगोश मे, सब की आंखो मे अश्रूधार दे करके ॥"

मै हमेशा खुद को तेरे (लहरों) सामने निःशब्द सा पाता हूं क्योंकि ना तेरेजैसी शालीनता है मुझमें और ना ही सहनशीलता, और ना ही मै खुद को इतने दर्द के बाद भी खुद को स्थिर रखने की क्षमता है मुझमें।चल हम फिर से एक दूसरे को अलविदा कहते है, इस उम्मीद मे की एक फिर नया सबेरा होगा और फिर से हमारी मुलाकात होगी॥"कभी-कभी, हमारी भावनाओं को वो समझ लेते है, जिनकी हमे उम्मीद नही होती। जबकि उन्हीं बातों को किसी को समझाने मे हमने मुद्दत गुजार दी होती है।"

चन्द्र प्रताप सिंह



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