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@dawriter

तरसता मातृत्व

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कल शाम मै अपने पुत्र को लेकर डॉक्टर के यहां गई थी दरअसल उसे मौसम बदलने की ऋतु में जुकाम व बुखार की शिकायत हो जाती है... मै हॉस्पिटल में वेटिंग हॉल में बैठी थी और अपने नंबर की प्रतीक्षा कर रही थी.. मेरे सामने एक युवती बैठी थी जो तकरीबन आधे घंटे से बेसब्री से चहलकदमी कर रही थी ...कभी बैठ जाती तो कभी चलने लगती ..उसके इन हरकतों से मै उसे नजरअंदाज नहीं कर पा रही थी.. मुझे लग रहा था कि, शायद वो बहुत परेशान है।

मेरा बेटा विजित काफी चंचल है.. उसने मुझसे कहा मम्मा ये आंटी घूम क्यों रही हैं? मैंने उसे चुप कराया ...कि, पता नहीं बेटा..' मुझे नहीं मालूम... पर विजित कभी दौड़ रहा था तो कभी मुझसे आकर लिपट जाता, किसी बच्चे से अपनी हाइट नापता तो कभी किसी अंकल की कॉपी करता ... मै उस की इन हरकतों से बहुत परेशान हो रही थी... कि ठीक से एक जगह बैठे रहों ...परेशान मत करो...! फिर मैंने देखा कि वह युवती बड़े ध्यान से मेरे बेटे को देख रही थी और मुस्कुरा रही थी ..तभी विजित किसी बच्चे की अचानक गिर जाने से जोर से हंस पड़ा..! मैंने उसे मना किया 'किसी के गिरने पर नहीं हंसते बेटा..! यह देखकर वह भी हंस पड़ी और उसकी आंखों की कोरों से आंसू टपक पड़े ...मेरे बेटे ने कहा.. 'मम्मा.. आंटी रो रही हैं' यह सुन कर वो और जोर जोर से रोने लगी मैंने उसे देखा तो खुद को रोक नहीं पाई एक अजीब सी हमदर्दी से मेरा मन भर गया मै उसके पास गई और उसने पूछा की क्या बात है ? आप रो क्यों रही हैं? बताइये मुझे..? और वो शून्य आंखों से मेरी ओर देखने लगी ..उसकी आँखों मे आंसुओं के साथ साथ प्रेम और करुणा भी दिखी ,ममता की झलक भी दिखी..!

... उसने अपनी जो कहानी बताई ...वह मै आपके सामने उसी के शब्दों में रख रही हूं...

युवती : मेरा नाम अवनी है.. मै और मेरे पति यहीं दिल्ली मे रहते हैं ..हम उत्तराखंड के रहने वाले हैं.. मेरी शादी को 10 साल हो चुके हैं.. पहले 7 साल तो मै मां बनने के लिए बहुत परेशान रही, मेरी सास ने हर संभव इलाज कराया.. लेकिन हर बार नाउम्मीदी का सामना किया ..डॉक्टरी इलाज से लेकर नीम हकीम तक, और पूजा पाठ से लेकर व्रत मन्नत सब किया... मज़ार से लेकर मंदिर तक हर जगह....दुआ, तावीज .. सब कुछ किया धीरे-धीरे सब मुझे बांझ कहने लगे क्योंकि ईश्वर ने कभी कोई खुशी का मौका आने भी नहीं दिया था ..हम दोनों की रिपोर्ट नॉर्मल थी मै अपनी उम्मीदें लगभग छोड़ने लगी थी..!

ऐसे ही जिंदगी चल रही थी कि, एक बार महीने में काफी दिन चढ़ गए...पर डेट नहीं आई...मगर मुझे कोई उम्मीद नहीं थी तो मैंने चेक नही किया पर शायद ईश्वर ने मेरी दुआ कबूल कर ली , उसको मुझ पर दया आ गयी ...और मै बहुत खुश हो गई पति को, मायके, ससुराल, सबको बता दिया कम से कम आशा तो जगी...मै तुरंत डॉक्टर से मिली... बच्चा सुरक्षित था .. सब कुछ सही था... फिर... वह दिन भी आया..जिसका मुझे बेसब्री से इंतेज़ार था... मेरे बेटे ने जन्म लिया और मेरे माथे की कलंक को हमेशा हमेशा के लिए मिटा दिया..!

घर में भी सब बहुत खुश थे किंतु एक दो माह के बाद मेरा बच्चा भूख लगने पर भी रोता नहीं था ..थोड़ा सा रो कर सुस्त हो जाता हालांकि मै समय-समय पर उसे फीड कराती थी.. ढाई माह का होने के बाद भी न वो हाथ पैर मारता.. न खेलता ..केवल आंखें खोलता और बंद करता..! ज्यादा रोता भी नहीं था बस हर वक्त सुस्त रहता.. ज्यादातर समय वह सोता रहता.. जब भूख लगती या सू सू व पाटी करता तो ज्यादा शोर भी ना मचाता.. सामान्य बच्चों के विपरीत था वह..! मै व्यग्र हो उठी .. कि आखिर ऐसा क्यों है? मैंने उसे डॉक्टर को दिखाया ... अच्छे से देखने के बाद डॉक्टर ने मुझे बताया कि उसका विकास थोड़ा धीमी गति से होगा.. किंतु आज लगभग ढाई साल का है वह ...और हमने यहां पर उसे भर्ती करवाया है उसका टेस्ट भी हो रहा है कि कुछ चांसेज हैं उसके ठीक होने के! या नहीं? न वो बोल पाता है, न ठीक से चल पाता है.. खड़ा हो जाता है... पर कदम बढ़ाते ही गिर जाता है... (वह कर वह फफक फफक कर रो पड़ी)

"तरस गयी हूं मै उसके मुंह से ' माँ ' शब्द सुनने के लिए..! अन्य बच्चों को जब मै लाड़-दुलार करते, हठ करते, चिल्लाते शोर मचाते, देखती हूं तो मेरे भीतर का मातृत्व उमड़ने लगता है कि, काश मेरा बच्चा भी मुझे हैरान परेशान करता ..! शैतानियां करता..! मुझे भी अपने बच्चे की बदमाशी और वो सारी हरकतें देखने का बहुत मन करता है जो कि सामान्य बच्चे किया करते हैं ईश्वर मुझे किस बात की सज़ा दे रहे हैं..? जो ऐसा दर्द दे रहे हैं ..! पहले तो मै मां बनने के लिए तरसी और आज जब मां बनी... तो पिछले ढ़ाई साल से मै उसके मुंह से माँ शब्द सुनने के लिए तरस रही हूं ..! इस तरह से तरस रही हूं अपने बच्चे की हँसी की किलकारी सुनने के लिए..उस के साथ खेलने के लिए...!

उसकी कहानी सुनकर मै भी तनिक व्यथित हो उठी..! कि, हे ईश्वर ....इस सृष्टि मे कितने रंग दिखा रहे हैं आप? कोई इतना भी दुखी हो सकता है कि संतान हो कर भी संतान का सुख नहीं है ..? मां बन कर भी वो मातृत्व के लिए तरस रही है ? क्या संसार है तुम्हारा प्रभु ! कोई मां नहीं बनने से दुखी है.. तो कोई संतान की कुशलता के लिए परेशान है.. कोई उसके इलाज के लिए पैसे जोड़ रहा है, तो कोई पैसे लेकर खड़ा है किंतु उसका कोई इलाज नहीं ...!

हे ईश्वर आप तो सभी के भाग्य की रचना करते हो..? दुनिया बनाते हो और दुनिया के खेल भी स्वयं रचते हो..! फिर किसी किसी की दुनिया इतनी सूनी क्यों? उसकी झोली में पिछले 10 सालों से संघर्ष ही क्यों लिख दिया..अजीब है आपकी बनाई सृष्टि भी और आप स्वयं भी...! शायद मुझ अज्ञानी की समझ से परे हो आप भी और आपके ये खेल भी..!

यदि आपको यह कहानी व्यग्र करने में सफल रही हो.. तो आप सभी से मेरी विनती है कि,आप सब अवनी के लिए... एक मां के लिए इसकी संतान के लिए ..और उसके तरसते मातृत्व के लिए ..दुआ अवश्य करें क्या पता किसी की दुआ से उसके जीवन में खुशियां आ जाए..!

- कविता जयन्त श्रीवास्तव...



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