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@dawriter

ज़िन्दगी कभी न, मुस्कुराई फिर बचपन की तरह....

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emotionseeker by  
emotionseeker

मिट्टी भी जमा की, और खिलौने भी बना कर देखे..
ज़िन्दगी कभी न, मुस्कुराई फिर बचपन की तरह....
आँख मिचौली भी खेली, साइकिल भी चलाई..
ज़िन्दगी कभी न, मुस्कुराई फिर बचपन की तरह...
रूठ कर भी देखा, रूठों को मना कर भी देखा..
ज़िन्दगी कभी न, मुस्कुराई फिर बचपन की तरह...
मन भी पढ़ा, मन खोल कर भी कहा..
ज़िन्दगी कभी न, मुस्कुराई फिर बचपन की तरह...
बच्चों संग खेल, बाँटा बड़ों संग दर्द..
ज़िन्दगी कभी न, मुस्कुराई फिर बचपन की तरह....
जी कर देखा, जीने का सहारा बन देखा..
ज़िन्दगी कभी न, मुस्कुराई फिर बचपन की तरह....



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