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@dawriter

चल चलें

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ए दिल चल चलें उन राहों पर
जहाँ हर गली में बचपन था
हर मोड़ पर एक रिश्ता था।
हर पतंग की डोर देती
सपनों को उड़ान थी....
हर पहिया साइकिल का
मौज की रफ्तार थी
हर खेल देता खून को
उबाल था
हर दोस्त हर पल
का साझेदार था
ढूँढता है आज दिल मेरा
फुरसत के लम्हों को
मिल भी जाए वो लम्हे तो....
वो लोग कहाँ से लाऊँ
जो आ भी जाए लोग तो....
वो बचपन कहाँ से लाऊँ



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