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@dawriter

घूंघरू

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kumarg by  
kumarg


घुंघरू उसे कितने प्रिय थे दुकान पर दो नहीं चार घुंघरू बाली पायल लूंगी कहकर मां से लड़ पड़ती थी । मां समझाती ज्यादा घूंघरू छमकाना ठीक नहीं है लोगों की नजर लग जाती है । फिर उसकी जिद के आगे हार जाती और तीन घूंघरूओं वाली पायल ले देती । मुँह फुलाये वो पायल पहन कर माँ पर अहसान करती ।

जबकि उसे ठीक ठीक याद था पहलीबार घूंघरू से परिचय उसकी माँ ने ही करवाया था । कैसे ठुमक ठुमक कर चलती थी वो आँगन में और माँ उसे सबकाम धाम छोड़कर निहारा करती थी ।

याद है पिता ने कितना झगड़ा किया था इतनी मँहगी चीजें खरीदने की औकात नहीं है हमारी तुम समझती नहीं हो । बेटी जात है अभी से जोड़ना शुरू करोगी तब जाकर इसके लिए ऐसा घर वर ढूंढ पाओगी जहाँ सुख से रह पाओगी । माँ डांट सुनकर भी हँस देती तुम बेटी को राजमहल भेजने के सपने देखते रहो । विधाता ने उसके जीवन में रानी बनने का सुख लिखा है या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन ये मेरे हाथ में है मैं उसे राजकुमारियों की तरह पालूंगी ।

फिर पिता परदेशी हो गये साल दो साल पर कभी आते लेकिन उसके नाम से खुले बैंक खाते में हर महीने की पांच तारीख को दस हजार रूपये जरूर आ जाते । उस रात सो नहीं पाती माँ के सीने से लग पूछती क्या पिता के मन में हमारे तुम्हारे लिए प्रेम की छोटी सी लौ भी नहीं जलती । माँ उसके बालों में अंगुलियां फिराती हुई बुदबुदाती कहते हैं तेरा मेरा प्रेम तो अखण्ड ज्योत है जो हमेशा जलता रहेगा । हम दोनों ने एक सपना देखा बेटी को सुखी जीवन देने का । तुम तो उसे राजकुमारी बनाकर पाल ले रही हो लेकिन मेरा उसके लिए राजकुमार ढूंढकर लाने का सपना कहीं अधूरा न रह जाए । बस उसी सपने की चमक में इस ज्योत की लौ कहीं छुप न जाए ।

आजकल उसके घूंघरूओं से न जाने माँ को क्यों चिढ़ होने लगी है । जबकि अब तो जब चलती है तो घूंघरूओं की छनकार सुन हर आता जाता उसे कितनी हसरत से निहारता है ।
माँ बाप के सपने से इतर उसने भी एक सपना देखा सिल्वर स्क्रीन पर चमकने का । माँ को समझा बुझाकर पिता को बिना बताये वो बम्बई पहुंच गई ।
थोड़े संघर्ष के बाद उसने अपने सपने पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए । आज फिल्म शूटिंग का पहला दिन है ।
उसे नृत्य दृश्य का अभिनय करना है पैरों में घूंघरू बाँधते हुए उसने घूंघरू की छनकार सुनी तो अबतक का पूरा जीवन एक फिल्म की तरह उसके सामने घूम गया ।
उसके कदम घूंघरू का बोझ नहीं उठा पा रहे हैं जबकि उसका सपना पूरा होनेवाला है । सपना तो उसके माता पिता ने भी देखा था । माँ ने राजकुमारी और पिता ने रानी का जीवन देने का । स्वयं का सपना उसे कहाँ ले जा रहा है ये तवायफ का किरदार । नहीं अपने सपने पूरे करने के लिए उनके जीवन भर के सपने को मिट्टी में नहीं मिला सकती ।
दिमाग भन्ना गया एक पैर में घूंघरू बांधे ही शूटिंग छोड़कर सड़कपर आ गई । आटो लिया और स्टेशन आई । अब वापस घर जा रही हूं ।

सामने बैठी लड़की उसकी बातें आँखें फाड़े सुन रही थी । दुनिया जहान के फिल्मी लोग अपना सपना पूराकरने भागे हुए मुंबई आते हैं और ये गजब फिल्मी लड़की है जो मुंबई छोड़कर भाग रही है ।
गाड़ी रूकी तो लड़की अपना टिकट उसे थमाते हुए उतर गई " रख लिजिए आपके काम आएगी । "
उसने आँखें फैलाई " अरे आप तो लखनऊ तक साथ चलनेवाली थीं । "
"वो मुस्कुरा उठी आपने मेरा सपना तोड़ दिया । "



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