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@dawriter

गुल्लक के टुकड़े

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आज रोज़ की तरह रिंकू कॊ लेटते ही नींद नही आयी सोच रहा था काश ! आज जो हुआ वो शाम कॊ ना होकर दिन मे होता तो कितना अच्छा होता कम से कम उसके पास समय तो होता अपनी गुल्लक के पैसे गिनने का। पर अब क्या फायदा ? अब तो इन्तज़ार था तो बस स्कूल से घर वापस आने का।पर साथ साथ ये डर भी था की कहीँ मम्मी उसमें से पैसे ना निकाल ले पर बेचारा करता भी क्या ? बड़ी मुश्किल से उसने टूटी गुल्लक के टुकडों कॊ पैसों के साथ ही रूमाल मे बाँध कर मम्मी कॊ दिया। अब बस यही सोच रहा था की गुल्लक मे लगभग कितने पैसे होंगे उसने अपनी गुणा भाग लगाना शुरू किया जब छुटटियों मे नानी के घर गय़ा तो 50 रुपये मामा जी ने 20 रुपये मौसी ने 10-10 रुपये नाना नानी ने दिये थे, तो कुल मिला कर 100 तो वहीं से हो गये थे और जब मेरठ वाली बुआजी आयी थी वो भी तो 50 रुपये दे कर गयी थी । बाकी उसने दादी ताऊजी और पापा से मिले हुए पैसे भी तो गुल्लक मे डाले थे शायद 200 रुपये होने वाले थे । अब तो रिंकू बस अपने आप कॊ ही कोस रहा था कि उसे क्या ज़रूरत थी गुल्लक कॊ छेड़ने की! ना वो उसके हाथ से गिरती और ना ही ये सब होता तो इस बार वो भी अपने जन्मदिन पर स्कूल नया बैग ले कर जाता । पर अफसोस ! बस यही सोचते सोचते ही कब उसकी आँख लग गयी पता ही नही चला। जब मम्मी ने उसे स्कूल जाने के लिये उठाया तब उसे एहसास हुआ की सुबह हो गयी। अब तो जल्दी से स्कूल भागना था बस फ़िर घर आकर सबसे पहले उसे पैसे गिनने थे । जैसे तैसे आज उसने स्कूल मे दिन बिताया ऐसा नही था की उसकी मम्मी या पापा कॊ उसकी ज़रूरत के बारे मे नही पता था पर वो भी घर की और जरूरतों कॊ पूरा करने मे लगे रहते थे। मम्मी ने सोचा था कि कम से कम रिंकू अपना बैग छः महीने तो और चला ही लेगा बस यही सोच कर उन्होने मोची से उसके बैग की चेन भी नयी लगवा दी थी। और बाकी की उधडी हुई सिलाई मम्मी ने घर पर ही लगा कर रिंकू कॊ ये कहते हुए समझाया था कि अभी तुम्हारे नये जूते आयें है तो ये बैग तो कम से कम छः महीने और चला लो फ़िर मौका लगते ही मै पापा से कह कर नया मंगा दूँगी आज कल नये बैग 200-250 से कम मे कहाँ आते है। रिंकू मायूस तो बहुत हुआ पर घर की हालत वो अच्छे से जानता था इसी लिये उसने सोच लिया था की वो बैग के लिये कुछ पैसे खुद ही जमा करने की कोशिश करेगा। पर अब?... अब तो लगता था की घर जायेगा और मम्मी से पैसे मांगेगा तो मम्मी तो उसे आज कल आज कल ही कर देगी अब रिंकू ने घर पहुँचते ही मम्मी से पैसों की फरमाइश कर दी और वही हुआ जिसका उसे डर था। मम्मी ने कहा की पहले खाना खा ले फ़िर आराम से गिन लेना पर रिंकू कॊ भूख ही कहाँ थी? आधा अधूरा खा कर ही उठ गय़ा । और फ़िर से मम्मी के पास गय़ा तो उन्होने उसे काम मे व्यस्त होने का बहाना कर के टाल दिया। अब उसके टयूशन जाने का समय हो गय़ा और वो उदास मन से चला गय़ा। अब उसकी उम्मीद पूरी टूट चुकी थी घर भी निराश मन से वापस आया पर ये क्या ? उसके आने के कुछ देर बाद ही पापा हाथ मे एक बैग लिये हुए आयें और रिंकू कॊ देते हुए बोले ये लो! तुम्हारा नया बैग ! पसंद ना आयें तो कल मेरे साथ चलना कोई दूसरा देख लेंगे। रिंकू कॊ तो जैसे कुछ समझ ही नही आ रहा था । फ़िर अंदर से मम्मी रिंकू की पैसों की पोटली लिये हुए आयी और बोली ये लो रिंकू ने कहा पर मम्मी ये तो बैग के लिये ही रखे थे और वो आ गय़ा। पापा और मम्मी दोनो एक साथ बोल पड़े ये तो तुम्हारे जन्मदिन का तोहफ़ा है ।और इन पैसों से तुम अगले महीने अपने जन्मदिन पर केक ला सकते हो रिंकू तो बस अब खुशी के मारे झूम उठा था उसे तो बस अब कल का इंतजार था जब वो अपने दोस्तो कॊ अपना नया बैग दिखायेगा जो उसे तोहफ़े मे जन्मदिन से पहले ही मिल गय़ा ।



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