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@dawriter

क्रियाकर्म

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समस्तीपुर के मनियारी गाँव में बाँध पर पुलिस जमी है प्रशासनिक अमले के साथ। बाँध दौसौ मीटर के करीब गायब हो गया है कई गाँव गायब हो गये हैं। दौ सौ मीटर दूर उस तरफ बचे बाँध के टुकड़े पर दीया टिमटिमा रहा है। असल में उधर एक छोटा सा गाँव बसा है चोरगांव। इस गाँव का प्रमुख पेशा है चोरी, छिनतई और सेंधमारी। तीन दिन बाद कमला मैया (कमला बलान ) का ज्वर ठंढ़ा हुआ है। पानी उतरना शुरु हुआ तो जगह जगह लाशों के ढ़ेर नजर आये।

एकमुश्त इतनी मौतें प्रशासन की परेशानी की वजह न बन जाए इसलिए रातों रात उन्हें बोरी में भर प्रशासन ने स्टीमर से दूसरी तरफ चोरगांव में फिंकवा दिया और वहाँ के मुखिया को कुछ पैसे देते हुए कहा इन लाशों को चुपचाप ठिकाने लगा दो और मुँह खोला तो गाँव में कोई न बचेगा। चोरगांव में आधीरात को पंचायत बैठी।

पंच 1:-सरकार से वैर लेना भी ठीक नहीं ,लेकिन इतनी लाशों को कैसे मिट्टी करेंगे।

पंच 2 :-कुछ मुसलमान भी तो होगें उनको मिट्टी में दबा देते हैं बाकियों को जला देंगे।

मुखिया:- फिर भी ज्यादा लाशे हैं खाना पकाने को लकड़ियां नहीं हैं और इतनी लाशें कैसे जलाएंगे।

पंच1 :- तो फिर सबको मिट्टी तेल छिड़ककर आग लगा देते हैं इतना केरोसिन तो होगा ही गांव में। जो बचा खुचा रहेगा पानी में बहा देंगे।

मुखिया :- चुपकर निर्लज्ज कलतक ये भी हमारी तरह इंसान थे। बल्कि हम चोरों से थोड़े अच्छे ही इंसान होगें।

पंच 2:- तो फिर आप ही बताओ कैसे करें।

मुखिया :-ऐसा करते हैं। मुसलमानों को दफना देते हैं, हैं ही कितने? कुछ मिला कर अट्ठारह बीस होंगे। और एक अलग बड़ी सी सामूहिक कब्र बनाकर सभी महिलाओं और बच्चों को दफना देते हैं। बाकि पुरुषों का दाह संस्कार कर देते हैं।

पंच 1:- लेकिन क्या इन महिलाओं और बच्चों का हक नहीं हैं कि इनको उचित तरीके से मिट्टी नसीब हो।

मुखिया :- ये चोरगांव के वासी नहीं है। सभ्य समाज के लोग हैं ये लोग अपने सारे हक सरकार बनाकर प्रशासन के पास गिरवी रख देते हैं। प्रशासन तय करता है इन्हें कौन सा हक है या नहीं। हमें प्रशासन ने ही तो ये काम सौंपा है।

पंच 1:- तो क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है क्या हम प्रशासन की तरह संवेदनाहीन हो चुके हैं।

पंच 2:- मै मुखियाजी से सहमत हूं। अभी यही सर्वोत्तम उपाय है बाद में सब ठीक हुआ तो हम इन्हें बाहर निकालकर उचित तरीके दाह संस्कार करेंगे।

मुखिया :- तो तय हुआ एक बड़ी कब्र खोदकर महिलाओं और बच्चों को एकसाथ तथा मुसलमानों को अलग दफना दो और बाकियों को जला दो।

पंच 2:- दफनाने से पहले जेवर वगैरह सब उतार लेना। इतनी मेहनत का कुछ फल भी तो होना चाहिए।

मुखिया :- ना ना ऐसा बिल्कुल मत करना वरना लोग पता चलने पर कहेंगे इन्हें चोरगांव वालों ने मारा है। जो बाढ़ की स्थिति है हमें भी ये जगह छोड़नी ही पड़ेगी। अगर हमलोग जाने से पहले इनका संस्कार न कर पाए तो कभी न कभी किसी को ये लाशें मिलेगी जरूर। उन्हें भी तो पता लगे सरकारें उनके जीने मरने का कितना ख्याल रखती है।



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