35
Share




@dawriter

क्यों करूँ करवाचौथ

1 191       

एक हफ्ते से घर में हल्ला मचा हुआ था। कभी सुबह की चाय के साथ तो कभी दोपहर में लंच पर फोन करके स्वरा को करवाचौथ ना रखो, यह कह-कह कर अमित थक गया था। अमित और स्वरा की शादी को दस साल हो गए थे। और शादी के पहले साल से स्वरा करवाचौथ का उपवास करती थी और हर साल अमित एक हफ्ते पहले से उसे ये बात मनाने में लगा रहता था कि वो ना करे।

इस बार भी इतिहास दोहराया जा रहा था। ये सब देख कॉलेज के बाद मिलने वाली अंजली से रहा नहीं गया। स्वरा तुम तो कालेज में महिला सशक्तिकरण का उदाहरण थी। पुराने घिसे पीटे नियमों का पालन करना अपनी तौहीन समझती थी। फिर ये करवाचौथ पर तुम्हें कब से यकीन हो गया। ये सब हम महिलाओं को दबाने के लिए बनाए गए उपवास है कम से कम तुम आज के जमाने की हो ,तुम्हें ये सब सूट नहीं करता।

अंजली मेरे परिवार में मम्मी को किसी ने करवाचौथ करने को नहीं कहा, पर वो करती थी। मेरी सास ने भी मुझ पर अपना फैसला नहीं थोपा कहा - मन हो तो ही करो, अमित तो हर साल एक हफ्ते पहले से ही ना करवाने की कोशिश में लगे रहते है। इसे हम महिलाओं को दबाना तो नहीं कह सकते ना....

सात जन्मों का साथ, लंबी उम्र का इससे संबंध है या नहीं पता नहीं ,पर कुछ तो बात है कि ना करने की पूरी पूरी आज़ादी के बावजूद हम पूरे मन से यह उपवास करते आ रहे हैं। मेरे मन में कभी आया ही नहीं कि मैं क्यों करवाचौथ करूँ? माँ सजती थी तो हम खुुश हो जाते थे कि हर रोज माँ को बाल अच्छे से बाँँधने तक का टाईम नहीं मिलताा था वो करवाचौथ के दिन पूरे सोलह श्रृगांर करती थी। खीर,पूडी ,कढ़ी, छोले की खूशबू घर महक उठता था। माँ बहुत सादगी से व्रत खोल लेती थी। पापा ने कभी मम्मी को पैर छूूूने नहीं दिए। और ना ही ससुुर जी ने।

वही सब कुछ सोच कर मैंने भी अमित के लिए उपवास किया। सोसायटी में भी ढेर सारी सजी धजी औरतें, मेंहदीवाली, चूड़ीवाली,ब्यूटीशियन सब को विशेष रूप से बुलाया जाता। पंडित आता, थालियाँ घूमतीं, हँसी मजाक के बीच। जो करवाचौथ ना भी करतीं वे भी आतीं ! शॉर्ट्स, मिनी स्कर्ट में घूमने वाली भी इस दिन भारतीय दिखती, हाथ-हाथ भर चूड़ियाँ! सर पर पल्ला, गजरा - मेंहदी।

मेरे सारे भूले बिसरे गहने जैसे पायल, करधन और नथ बाहर आती हैं। मंगलसूत्र भक्ति और गर्व के साथ पहना जाता है| मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियाँ अमित के साथ मेरे जीवन में आए है इसलिए अमूल्य हैं। इन सब को पहनने के बाद लगता है जैसे आज भी मैं नयी नवेली दुल्हन हूँ। ये सभी हमारी समृद्ध परंपरा और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। ये उपवास मैं इसलिए करती हूँ क्योंकि अमित मेरे जीवन में अलग महत्व रखते है। हर बात पर तर्क लाना ही महिला सशक्तिकरण नहीं कहलाता, परंपरा के लिए अपने सिर को झुकाना समझदारी कहलाती हैं।

हम सभी जानते हैं कि तर्क काम करता है, लेकिन हमेशा नहीं .... कभी जीवन में कुछ रहस्य, कुछ चमत्कार के लिए गुंजाइश रखनी चाहिए। रही बात ये कि अमित क्यों मेरे लिए ये उपवास नहीं रखते तो हर साल वो ये कहते है की मुझे भी उपवास करना है पर मैं उस दिन एक भूखे अमित की चिढ़-चिढ़ नहीं चाहती। बस चाहती हूँ अमित से प्रेम की अनूभूति! अच्छा लगता है आसमान के चाँद के साथ अपने जीवन के सूरज को छलनी में देखना। खुशी मिलती है जब उपवास के बाद अमित पानी पिलाते है,मेरी पंसदीदा रबडी खिलाते हैं। इसलिए मैं करवाचौथ करती हूँ।

हाँ जिनके पति पत्नी को सम्मान नहीं देते, पत्नी तो दूर इंसान होने का दर्जा भी नहीं देते, पूरे साल मानसिक और शारिरीक प्रताड़ना दे तो वह उपवास क्यों रखे? ताकि पति लम्बी उम्र पाकर पूरे साल फ़िर वही सब करे। उसे कुलटा कुलक्षणी चरित्रहीन और ना जाने क्या-क्या कह सके। अखिर क्यों। तो फिर ऐसी पत्नियाँ क्यों करे करवाचौथ।

आप करवाचौथ क्यों करती हैं ओर यदि नहीं करती तो क्यों नहीं....मुझे आपके जवाब का इंतजार रहेगा।

मनीषा गौतम



Vote Add to library

COMMENT