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@dawriter

औरत की जंग

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kumarg by  
kumarg

 

मच्छरहट्टे में दो किलो रेहू तौलाने के बाद विधायकजी के पोते ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो गंगिया मलाहिन ने फांसुल चला दिया । दूर्योग से निशाना ऐसा चूका की नेताबीज जीवन भर के लिए बियाह से वंचित हो गये ।

पुलिस वैन में बैठती मलाहिन को देखकर बलात्कार का आरोपी कलुआ वैन से उतर गया । कह रहा था इससे माछ की गंध आएगी ।
मलाहिन ने मुक्का मारकर उसका नाक तोड़ दिया । दारोगाजी हँसे "चलो अब बैठ जाओ दोनों ,अब तो गंध न आएगी ।"

रास्ते में दारोगाजी ने पूछा "तेरा मरद आएगा न जमानत करवाने , थाने में ज्यादा देर जनानियों के रूकने का इंतजाम नहीं है । "

मलाहिन धीरे से बोली " न पैकार आएगा देर सवेर, जब शाम को पैसे लेने आवेगा तो उसे मालूम पड़ेगा । "
श्यामवर्णीय शीश पर खींची लाल रेखा को घूरते दारोगा को देख वो बोली " मरद किया था , लेकिन सिर्फ बच्चा करने तक साथ रहा ,बाद में भाग गया घर गृहस्थी के खर्चे और गरीबी से ऊबकर । सुना है डूब गया लेकिन मैं जानू हूं मल्लाह की औलाद न डूबे । आएगा वापस एक दिन भगोड़ा , मुझसे न सही बचवा से तो बहुत प्रेम था उसको । "

कहते हुए पल्लू मूंह में भर सुबकने लगी । दारोगा ने धीरे से कहा "लगता है बहुत प्रेम था उससे तुमको तभी अभी भी सिंदूर लगाती हो । "

उसने घृणा से कलुआ की तरफ देखा " हाँ साहब उसकी तरह भाग जाने से तो मेरी दिक्कत सुलझेगी नहीं । तो बस बहादुर होने का स्वांग धरे लड़ रही हूं औरत होने की जंग । "

 



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