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@dawriter

ए जिदंगी

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ए जिंदगी कुछ तो मेरे मन मुताबिक दे
दे रही सब अपने मन का
कुछ तो मुझको तू मेरे मन के माफिक दे।।
जाने कितने तेरे मेरे हिसाब बाकी हैं।
पूछे तुझसे कितने सवाल
उन सबके जवाब बाकी हैं।
दिये कुछ तारे मुझे तूने खैरात में
मेरे हिस्से के अभी आफताब बाकी हैं।
अभी तक तो कुछ पन्ने लिखे
लिखनी मुझे पूरी अभी किताब बाकी है।
ए जिदंगी तू तो कम स कम मेरा साथ दे
घिरी हुई हूँ मुश्किलों मे,मुझको अपना हाथ दे।
मिल रही है शह अंधियारों को
चल मेरे संग उनको मात दे।
जो मुझे ना करे कमजोर
मुझे ऐसे जज्बात दे।।
ए जिदंगी आ बैठ कुछ बातें करते हैं
जो निभा सकें हम दोनो
चल ऐसे वादें करते हैं।
बहुत जी चुके गम के पल
चल खुशी की बरसातें करते हैं।
हर पल जो रहे याद हमे
एक दूजे के नाम हम वो सौगाते करते हैं
ए जिदंगी,ए जिंदगी••••••••••••••।



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