1
Share




@dawriter

एक सफ़र

0 5       
advit by  
advit


वो सफ़र मैं है ,
अपना पता नहीं उसको और दूसरों की ख़बर मैं है

उसको मालूमात है अपने घर की
और फिर भी ढूंढ रहा की आखिर सकून जाने किस शहर में है ।।
वो सफ़र मैं हैं ....

अपने लिए वक़्त कहाँ से लाये वो
दुनियादारी निभाते निभाते फसाता जो जाये वो

कितना अजीब हैं ना ,आज का पता नहीं उसको
और फिर भी कल उसकी नजर मैं है।।
वो सफ़र मैं है...


वो लढ़ा है दुनिया से , अपने बच्चो को भी लढ़ायेगा
खुद कभी गया हो न हो , बच्चो को CBSE ज़रूर पढ़ायेगा

अभी कुछ कदम ही चले है उसने
और वो सफ़र ख़तम होने की फ़िकर मैं है ।।
वो सफर मैं है ....



Vote Add to library

COMMENT