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क्यूटिया

kumarg   290 views   6 months ago

वह आंचल समेटकर दुआएं देती चली तो गई। लेकिन बालक मेरी तरफ देख कुटिल मुस्कान देता हुआ आंटी से संबोधित हुआ " कुछ लोग इतने क्यूट होते हैं कि खुद के पाजामे में एक दिन गांठ पर जाए तो जमाने भर को लुंगी पहनने की सलाह देते फिरते हैं।"

Prayer To Death

AJAY AMITABH SUMAN   13 views   7 months ago

This is a poem about a soul, who always tried to evade death by citing various reasons.

अपना सा घर

Sharma Divya   755 views   9 months ago

जिसके लिए बचपन से तरसती रही वह घर आखिर मिल ही गया पवित्रा को।

रीति रिवाज हैं 'दहेज' का दूसरा नाम

Kalpana Jain   525 views   11 months ago

आज कल देहज को मांग कर नहीं रीत रिवाज के नाम पर लिया जाता है।

सच्चा सैल्यूट

Mohit Trendster   204 views   11 months ago

विमलेश - "अच्छा, थाने के आस-पास ये बुढ़िया कौन घूमती रहती है? इतना मन से सैल्यूट तो सिपाही नहीं मारते जितने मन से वो सैल्यूट करती है।" दीवान - "अरे वो पागल है सर कुछ भी बड़बड़ाती रहती है। डेढ़ साल से तो मैं ही देख रहा हूँ..."

अंत

mmb   1.21K views   11 months ago

उसको अपने अंत का अहसास होने लगा था

आसान नहीं "माँ" बनना..

Kalpana Jain   527 views   1 year ago

बहुत मुश्किल हालतों से गुजरने के बाद एक नन्हीं ख़ुशी गोद में आई।

शांति निकुंज

kavita   1.33K views   1 year ago

वर्तमान युग मे अविश्वसनीय प्रेम की पराकाष्ठा को प्राप्त एक मार्मिक प्रेम कथा

चले जाओ

mmb   1.33K views   1 year ago

सात साल से पति की राह देखती पत्नी

मानव श्रेष्ठ

Rajeev Pundir   302 views   1 year ago

अक्सर हमें यही उपदेश दिया जाता है कि पृथ्वी पर पाए जाने वाली सभी योनियों में मानव योनी सर्वश्रेष्ठ है I लेकिन क्या ये सही है ? शायद नहीं I हर एक जीव जंतु पशु पक्षी अपने में सम्पूर्ण है I अस्तित्व की इस लड़ाई में वो किसी को हरा भी सकता है और किसी से हार भी सकता है I

तू धूप है छम्म से बिखर

Pallavi Vinod   1.04K views   1 year ago

अपनी जवान होती बेटी को आधुनिकता के भटकाव से एक माँ ही निकाल सकती है।

पैसे की खनक या किस्मत की मार ??

Kalpana Jain   75 views   1 year ago

आज रुपये दे कर कहीँ भी कुछ भी करवाया जा सकता है या फिर किस्मत तेज़ होती हैं।

वो चेहरा कहीं खो गया।

rita1234   526 views   1 year ago

माँ का महत्व हम सब को मालूम है। बचपन से लेकर हर अवस्था में हमे माँ के स्नेह और प्रेम की जरूरत होती है

मैं नहीं भेजूगी अपनी बेटी को ससुराल..

Kalpana Jain   175 views   1 year ago

एक माँ की अपनी बेटी की जुदाई के दर्द की दास्तान है।

चीनी

kumarg   851 views   1 year ago

चीनी फज्र की नमाज के बाद खाँ साहब गणेशी के चाय की थड़ी पर अखबार पढ़ने बैठ गये। अभी भट्टी गरम होने में कुछ समय था ग्राहक इंतजार से ऊब चले न जाएं इसलिए गणेशी ने टीवी ऑन कर दिया। समाचार आ रहे थे जवानों से भरी बस में हुआ विस्फोट।