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भीड़ के अलग अलग चेहरे

dhirajjha123   9 views   2 years ago

“हाँ हाँ महराज जाइए ना हम कहाँ रोक रहे हैं । मगर एक बात कह दें आप जईसा लोक सब के चलते देस पिछड़ा है । लालच है ना जो वो देस की जनता के मन से जब तक नहीं जाएगा देस का भला संभब नहीं है महराज ।”

रूपया बोलता है

rashmi   9 views   2 years ago

धन की अधिकता और दुरूपयोग पर रूपये की ओर से इंसान को समझाने की कोशिश

Murdered by others

jhalak   8 views   2 years ago

Sometime force marriage social abuse acid attack..woman is hunted ....

​एक कदम….

dhirajjha123   8 views   2 years ago

फैसले बुरे हैं थोपे गए हैं इंसान मर रहे हैं कुछ शोर कर रहे हैं कुछ की दास्तान है रूलाने वाली आखों में सबके पानी

असहिष्णु देश मेरा-

arn   8 views   2 years ago

कुछ विशेष तथाकथित बुद्धिजीवीयो द्धारा आतंकी और नकस्लियो की पैरोकारी करके विवाद खड़ा करना.........और खुद को लाइनलाइट मे रखने की कला का गुणगान.

Just be who you are..

Shreya Dubey   8 views   2 years ago

Be the one who you are. What other wants from you should not matter..

​क्या तुम जानते हो

dhirajjha123   5 views   2 years ago

क्या तुम जानते हो गुलामी किसको कहते हैं ?

Sparkle!! Shine!!

Shreya Dubey   5 views   2 years ago

Be your own superhero. Sparkle!! Shine!!

अच्छी माँ बन जाऊं

dhirajjha123   4 views   2 years ago

एक पिता जब माँ बनता है तब एक पुरुष अपनी विपरीत दिशा में चलता है

बेचारा नहीं हूँ

dhirajjha123   3 views   2 years ago

मैं कोई आवारा नहीं हूँ तरस मत खाओ मुझ पर

Silent Cries

troubleseeker11   3 views   2 years ago

This poem is an attempt to spread awareness about the atrocities faced by women in this modern age.

"डर"

dhirajjha123   1 views   2 years ago

क्या तुम जानते हो सबसे बहादुर होता है ये डर हाँ मैं सच कह रहा हूँ

Me as a new Traveller

troubleseeker11   1 views   1 year ago

This poem will help you to be better as a traveller again.