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कामवाली बाई के साथ ATM फ्री।

Maneesha Gautam   920 views   1 year ago

मेरी बेटी जाँब करना चाहती है या नही ये मेरी बेटी का निणर्य होगा। जितनी दिन रात की मेहनत एक लड़का इस मुकाम तक पहुँचने के लिए करता है उतनी ही मेरी बेटी ने भी की है. जितनी प्रथानाऐ लड़के के माता पिता ने की है उतनी ही श्रद्धा से हमने भी ऊपर वाले के सामने हाथ जोड़े हैं। कि हमारे बच्चे को सफल करे।

​एक कदम….

dhirajjha123   8 views   2 years ago

फैसले बुरे हैं थोपे गए हैं इंसान मर रहे हैं कुछ शोर कर रहे हैं कुछ की दास्तान है रूलाने वाली आखों में सबके पानी

Suicide

akshay khodpatil   13 views   2 years ago

For that guys who do suicide because of one girl left.

अच्छी माँ बन जाऊं

dhirajjha123   4 views   2 years ago

एक पिता जब माँ बनता है तब एक पुरुष अपनी विपरीत दिशा में चलता है

वक्त के झरोखा

gourav11698   19 views   2 years ago

समय जो निकल गया या आने वाला है... हमनें कैसे व्यतित किया या हमारे क्या प्लान है .. यही सब कुछ है जीवन में वक्त के साथ समझ बड़ती है.. पर उतनी नहीं जितना हम समझ लेते हैं..🙏 तो मैं लाया हूं अपनी कुछ यादें अपने कुछ प्लान.

मेरा देश बदल रहा है....

Shyam Tiwary   11 views   2 years ago

मेरा देश बदल रहा है मेरी खुद की नजरिया है.... मैंने खुद आंखों से देख रहा हूं जो चीज तारीफ के काबिल होती है उनकी तारीफ करनी चाहिए....

​क्या तुम जानते हो

dhirajjha123   5 views   2 years ago

क्या तुम जानते हो गुलामी किसको कहते हैं ?

पापा के नाम एक और चिट्टठी

dhirajjha123   45 views   2 years ago

पापा आपके लिए चिट्ठी है, कितने दिनों से नही लिखी थी ना । पढ़िएगा ज़रूर और आशीर्वाद दीजिएगा अपने नालायक बेटे को ।

ईश्वर के होने का प्रमाण ( कहानी )

dhirajjha123   63 views   2 years ago

एक समय एक बहुत ही पहुँचे हुए संत हुआ करते थे । हर गाँव हर जगह घूम घूम कर ज्ञान बाँटते और लोगों का ध्यान ईश्वर की तरफ आकर्षित करते । बड़ा।नाम था उनका । उनके प्रवचन को सुनने के लिए लोग सारे काम धंधे छोड़ कर आ जाया करते ।

जो हम फेंक देते हैं उसी का ना मिलना इनकी जान ले लेता है

dhirajjha123   80 views   2 years ago

आज माँ के हाथ का खाना खाने का मन नहीं कर रहा तो चलो बाहर चलते हैं दोस्तों के साथ । होटल में बैठ कर शाही पनीर चिली चिकेन बटर नान ये वो लटरम पटराम मंगाया जीतना मन उतना खाया बाकि का छोड़ कर डकार ली और चल दिए । कभी कभी तो गुस्से में थाली उठा कर फेंक दी ।

बेचारा नहीं हूँ

dhirajjha123   3 views   2 years ago

मैं कोई आवारा नहीं हूँ तरस मत खाओ मुझ पर

पिता के रंग

dhirajjha123   13 views   2 years ago

पिता उस छेनी और हथौड़े की तरह होते हैं जो खुद के चेहरे की उदासी छुपा कर चोट करते हैं , इतनी चोट जो तुम जैसे पत्थर को नायाब मूर्ती में तराश दे |

......इंतजार करना

rashmi   25 views   2 years ago

किसी को खामोश़ या बेबस समझ अक्सर लोग उसका फायदा उठाकर चले जाते है या बार बार उसे परेशान करते है जैसे कि वो कुछ प्रतिक्रिया कभी देगा ही नहीं. एेसी ही परिस्थिति में उस बेबस के मन के भाव जब उसकी खामोशी टूटने को तैयार हो जाती है.

वो चाय आज भी ड्यू है. (स्मृति शेष)

rgsverma   264 views   2 years ago

मैं अवाक रह गया पर उन्होंने आगे बताया कि , "इंटरव्यू उनका लिया जाता है जिनसे हम अपरिचित हों, न मेरी तुमसे कोई रिश्तेदारी है, न कोई व्यक्तिगत परिचय, पर तुम गज़ब लिखते हो, दिल से लिखते हो, सो भूल जाओ कि मैंने तुम पर कोई अहसान किया है. चयन तो तुम्हारा ही होना था, ..." मैं नि:शब्द हो गया.

गुलाम-ए-हिन्द (करगिल काव्य श्रद्धांजलि)

Mohit Trendster   10 views   2 years ago

छंट गया सुर्ख धुआं कब का....दब गया ज़ालिम शोर .... रह गया वादी और दिलो में सिर्फ....Point 4875 से गूँजा "Yeh Dil Maange More!!" ज़मी मुझे सुला ले माँ से आँचल में ....और जिया तो मालूम है ... अपनी गिनती की साँसों में यादों की फांसे चुभ जानी ... रूह गुलाम-ए-हिन्द दिवानी....