0
Share




@dawriter

​एक कदम….

0 7       
dhirajjha123 by  
dhirajjha123

फैसले बुरे हैं 

थोपे गए हैं 

इंसान मर रहे हैं 

कुछ शोर कर रहे हैं 

कुछ की दास्तान है 

रूलाने वाली 

आखों में सबके पानी

ये कैसा राज आया 

जिसने जनता को रुलाया 
मगर 
सबने तमाशा देखा

जल रही आग का ताप सेका

मगर मदद के लिए आगे कोई ना आया 

किसी ने अपनी जगह ना खड़ा कराया 

बुढ़ा है ज़रूरतमंद है 

बिमार है परेशान है 

अपनी जगह ही दे दो 

तुम देर से घर चले जाना 

कोसने से तो है अच्छा 

हाथ ही बढ़ा दो 

जो गिरा है उसे उठा दो 

माना है तानाशाही 

पर तुम तो हो सिपाही 

कितना सच बोलते हो

सियासत के एक तरफा भेद 

खोलते हो 

कभी दिल को भी तो खोलो

नालियों से दरिया भी तो हो लो

जो लोग मर रहे हैं 

या बिमार पड़ रहे हैं 

उनकी मदद ही कर दो 

हाथों में दो चार सौ ही धर दो

क्रेडिट कार्ड से दवाईयाँ दिला दो

दो घड़ी मन ही बहला दो 
बोलने से है हमेशा अच्छा 

कुछ कर के दिखाना 

एक जगह पर खड़े रह कर 

शोर करने से अच्छा 

एक कदम आगे बढ़ाना 
धीरज झा



Vote Add to library

COMMENT