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@dawriter

हम क्यों नहीं हासिल कर सकते अपना लक्ष्य

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harish999 by  
harish999

थ्री इडियट का वह लोकप्रिय डायलॉग याद है जिसमें आमिर खान शरमन जोशी से कहते हैं कि सफलता के पीछे मत भागो, काबिल बनो सफलता झक मार पीछे आएगी। और काबिल यूं ही नहीं बना जाता। काबिल बनने लिए कड़ी मेहनत और दूसरों का सम्मान करना जरूरी है। कोई भी अपने आप में पूर्णता नहीं रखता। किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे अनेक लोगों का सहयोग होता है। हां, यह अलग बात है कि सफल एक को ही माना जाता है। जीत का ताज एक ही होता है, तो उसके लिए किसी न किसी का सिर तो होना ही है। तब ऐसे में किसी एक को नामित कर दिया जाता है। बाकी सब उसकी सफलता के लिए ही प्रयास करते हैं। जैसे महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट की दुनिया के सफल खिलाड़ी माने जाते हैं , लेकिन कोई यह कैसे भूल सकता है कि सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड, जहीर खान, हरभजन सिंह की काबिलियत न होती तो महेंद्र सिंह धोनी क्या कर लेते। सफलता के मुकाम पर पहुंचते ही कोई भी आसानी से कह देता है कि उसकी सफलता के पीछे उसकी मां का, पिता का या फलां अध्यापक का या फिर दोस्त का हाँथ है। जबकि उसकी सफलता के पीछे इन सभी की मेहनत और प्यार का हाथ होता है। सबका अपना महत्व होता है, सब अपना-अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाते हैं। इनमें से अगर कोई एक भी बेईमान हो जाए तो सफलता का सवाल ही पैदा नहीं होता। मां-पिता का प्यार, अध्यापकों की सीख और दोस्तों का उपहास ही हमको काबिल बनाता है।

काबिलियत एकमुश्त नहीं मिलती, वह समय के साथ-साथ धीरे-धीरे हासिल होती है। लक्ष्य के प्रति हमारी एकाग्रता और व्यवहार भी महत्वपूर्ण है। जिंदगी में कुछ हासिल करने की इच्छा मन में हो, तो उसको हासिल करने के लिए उसमें पागलपन की हद तक रम जाओ, वह आपको जरूर मिलेगा। यहां कुछ भी असंभव नहीं है। बस हम ही उल-जुलूल सोचते हुए प्रयास नहीं करते। क्या कभी किसी ने सोचा था, चांद पर घर बसाने की या आसमां में उडने की। लेकिन करने वालों ने यह भी संभव बना दिया। तब फिर हम अपने लक्ष्य को क्यों नहीं हासिल कर सकते। जिंदगी में कुछ भी करो, पहले स्थान पर आने के लिए करो। किसी न किसी को प्रथम स्थान पर आना ही है, तो फिर क्यों न हम ही पहले स्थान पर रहे।



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