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@dawriter

सितारा

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सितारा

सड़क का हाल इतना बढिया था कि लॉरी पर चढ़ने के बाद और उतरने से पहले लोग केवल भगवान का नाम ही लेते रहते थे। 12 की जगह 25 सवारी बिठा लेना संजू के लिये बायें हाथ का खेल था। लॉरी चलते समय चलती कम और हिलती ज्यादा थी।

आगे सड़क पर खड़ी बुलेट के साथ खाकी वर्दी को देख उसके मुँह से भद्दी गाली निकली," फिर, नमरी ऐंठ लेगा ससुर का नाती।" कुछ सवारियों ने मुँह बिचकाया और बाकी ने अनसुना होने का एक्टिंग किया।

बुलेट के पास पहुँचते ही लॉरी रोक दौड़ते हुए वर्दीवाले के पास भागा और नमरी पकड़ाते हुए कहा,"साहेब! हम रोज़ इसी रुट में चलतें हैं।" " ससुरा! यह क्या है रे?"

अकड़ देख उसका ध्यान वर्दीवाले के कन्धे पर गया जहाँ सितारे जगमगा रहे थे।

"माई-बाप, गलती हो गया।" झट से उसने नमरी को जेब में दबाया और दूसरे जेब से पनसैया निकाल सितारे के चरणों में समर्पित कर दिया। वर्दी का अकड़ जारी था," रोड का खस्ताहाल है और ऊपर से जो तुम भेड़-बकरी की तरह भर लेते हो! दुर्घटना होगा तो उसका जिम्मेदारी तुम्हरा बाप लेगा क्या?"

"क्या करें सरकार? पापी पेट के लिये सब कुछ करना पड़ता है।"

"पेट के लिये लॉरी चलाओ। सवारियों के जान से मत खेलो, समझे! और सुनो, किसी दिन पलट गया न तो पापी पेट के साथ साथ तुम भी निकल लोगे।

"पनसैया उसके हाथ में थमाते हुये सितारा दोबारा जगमगाया," गरीब आदमी कितना मेहनत से पैसा कमाता है, हम नहीं जानते हैं क्या? हमारे बाबूजी का भी लॉरी चलाते समय ही एक्सीडेंट हुआ और ...."

©मृणाल आशुतोष

Image Source: atmtxphoto



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