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@dawriter

सत्य का भान

3 27       
jhalak by  
jhalak

 

पीछे छोड़ दिया मैंने जीवन की हर सच्चाई को......
आशाओ की महफिल को,गैरों की हर रुसवाई को,

पथ-प्रदर्शक बने थे जो, उनकी हर झूठी कार्यवाही को,
मेरी हर इक मजबूरी को और सत्य से बनी हर दूरी को,
नित होती हर विफलता को, अक्षमता की डोरी को,
पीछे छोड़ दिया मैंने जीवन की हर सच्चाई को.....
"मैंने तुझसे जो बात कही"शब्दों की इस पुरवाई को,
लेन -देन की भाषा को,अहसानो की भरमाई को,
वाद -विवाद की गाथा को,अहम की हर लड़ाई को,
अपनों की जगहंसाई को, बेमतलब की हर लड़ाई को,
पीछे छोड़ दिया मैंने जीवन की हर सच्चाई को.....



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