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@dawriter

शब्दों का महत्व

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udyalkarai by  
udyalkarai

कैसे चुप कर दूँ इस कलम को
मेरे शब्दों की जननी है ये

शब्द..
वो जो लबों से ज्यादा कह जाते हैं
वो जो हर दर्द,हर ख़ुशी की व्याख्या बिना किसी मुश्किल के कर जाते हैं
किसी से न जुड़कर कर भी हर किसी का हिस्सा बन जाते हैं

हर कवि,हर लेखक का श्रृंगार हैं
हमारी पहचान,हमारी सोच की परिभाषा हैं
इन शब्दों में ना कोई डर की अनुभूति होती है
ना इश्क की आरजू
और ना ही कुछ पाने का लोभ
बस एक छोटी सी उम्मीद लेकर
बिखर जाते है उस कोरे कागज़ पर
अपनी भावनाओं को दर्शाने..

इस स्वार्थी दुनिया में बस लोगों के मन में एक दुसरे को नीचे गिराने की कोशिश है
खुद सबसे ऊपर आने का लोभ
और एक ओछी सोच..
वो सोच जो हमारे समाज में आती दरारों की वजह है

पर हर वो लेखक जो अपनी कलम का सहारा लेता है अपनी अनकही बातों को बताने के लिए
उसकी एक निस्वार्थ कोशिश रहती है
अपने शब्दों से इस दुनिया को बदलने की
और अगर तुम उसकी इस कोशिश को सराह नहीं सकते तोह अपने फ़िज़ूल लफ्ज़ों से उसकी इस कोशिश पे सवाल तोह मत उठाओ
बस दो पल अपने व्यस्त दिनचर्या से निकाल कर उसके शब्दों को समझो
वो शब्द जो तुम्हारे लिए हैं..



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