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@dawriter

रंग

2 14       
sonikedia12 by  
sonikedia12

मनुष्यों का नाम बदल दो

करे ये सबको बदनाम ।

गिरगिट रंग बदलता है
खुद  को बचाने को,
अपना भोजन पाने को,
है  ये उसकी फिदरत ।।

मनुष्यों को देखा मैंने ..
रंग और स्वभाव बदलते ,

साँप काटे एक बार
फिर बचें ना कोई ,
मनुष्य काटे बार बार ..
जीने दे ना मरनेे दे,

किससे खौफ़ खाये अब,
अपनी जाती को
समझ ना पाये ।

साँप बदलने लगेंगे
फिदरत अपनी ,
गिरगिट ना रंग बदलेगा।
तुम सबकुछ ले लो ,

हे मानव !

हमारा स्वभाव ,
हमारी फिदरत ,
हम तो बस जीना चाहते ।
कुछ साँसें लेना चाहते ।
कुछ साँसें लेना चाहते ।।

              Soni kedia



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