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@dawriter

मासिकधर्म या कुरीति

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nis1985 by  
nis1985

#मासिकधर्म या कुरीति

अम्मा, अम्मा, कमली दौड़ी-दौड़ी हांफते और हड़बड़ाते हुए अपनी अम्मा के पास आई,
का हुआ रे कमली अइसन काहे भाग रही घोड़ा पर सवार होकर,
अम्मा,अम्मा, अरे का हुआ री बोलेगी भी अबै कुछ,

कमली एकदम से सहमी और संकोच में चुप सी खड़ी रही,

कमली की अम्मा थोड़ी परेशान सी हो गयी, बिटिया को ऐसे देखकर, उसने धीमे से पूछना उचित समझा,

अच्छा बता मेरी बिटिया, का हुआ है तोहका
अम्मा ने कमली के सर पर हाथ फेरते हुए पूछा,
कमली एकदम से रोने लगी अपनी अम्मा से लिपटकर
अम्मा, आज हमरे पेट पर बहोत मरोड़ उठ रहा है,

अरे तो बिटिया चल अजवाइन खा ले सब ठीक हो जावेगा ई मा रोने का का जरूरत है,
नहीं, नहीं अम्मा हमरी जांघे भी बहुत टूट रही,
इतना सुनते ही कमली की अम्मा को थोड़ी शंका हुई,
अब उसकी कमली बड़ी जो हो रही थी, समय तो आ ही गया था कि ये दिन भी आता, समय ऐसे पंख लगाकर निकला कि कमली की अम्मा को होश भी नहीं रहा कि आज छोटी सी कमली इतनी बड़ी हो गयी और ये दिन भी आ गया,

कमली की अम्मा ने कमली को पीछे घुमाया, तो वही हुआ, आज कमली को मासिकधर्म की शुरुआत हो चुकी थी, कमली इन सब बातों से अनजान डरी, सहमी सी बस रोए जा रही थी,
उसे इस बारे में कोई भी ज्ञान न था और न ही अम्मा ने भी कभी बताया,
ये चीजें तो कमली की अम्मा भी हर माह झेलती है, पर उसने आजतक कमली को कभी भनक भी न लगने दी,

बस ये सुनते ही कमली की अम्मा शुरू हो गयी सुन कमली आज से तू ७दिन पूजा कमरे में नहीं जाएगी, घर के लोगो को छुएगी भी नहीं, रसोईघर मे तो भूल कर घुसना भी मत और आचार पापड़ छुआ भी तो मुझसे बुरा कोई न होगा, और हो सके तो अलग कमरे में सोना,

ये सब सुन कमली एकदम स्तब्ध सी हो गयी उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसे कोई भयानक छूत की बीमारी हो गयी और सब उससे अछुतो जैसा बर्ताव कर रहे,

एक तो वो ऐसे ही डरी सहमी हुई थी औऱ ऊपर से अपनी अम्मा की ये सब कुरीति भरी बातें सुनते ही वो और भी ज्यादा डर गई,

अम्मा ने कमली को भी बस कपड़ा उपयोग करने की सलाह दी जैसा वो खुद करती थी, और कमली को उसके बाद एकदम से ये बोलकर चुप करा दिया, कि अब हर महीने तुझे ये झेलना ही पड़ेगा,

मासिकधर्म का नाम सुनते ही कमली की अम्मा ने कमली को वो सब बेकार की बातें बताना शुरू कर दिया जो
उतनी जरूरी अभी नहीं थी, जितनी बाकी बातें,
कमली को इस तरह एहसास दिलाना की वो ये न छुये, वो न छुये,

उससे पहले उसे ये बताना जरूरी था कि वो अपने शरीर का ध्यान इन दिनों कैसे रखे, कैसे साफ-सफाई पर ध्यान दे, जो कि उसकी अम्मा ने सही ढंग से उसे न समझाया

कमली को ये बताना ज्यादा अहम था, कि उसके शरीर मे ये बदलाव एक बॉयोलोजिकल प्रॉसेस है, इसमे डरने की कोई जरूरत नहीं है, इस क्रिया से एकदिन हर लड़की को गुजरना पड़ता है,

मासिकधर्म तो प्राकृतिक क्रिया है जो एक स्त्री को गर्भावस्था के लिए तैयार करता है, ये ईश्वर की देन है जो एक स्त्री को माँ बनने का सौभाग्य प्रदान करता है

पर मासिक धर्म का नाम सुनते ही सबका ऐसे रिएक्शन होता है जैसे ये एक घृणित शब्द हो, इसी घृणा,डर और शर्म की वजह से ही आज ग्रमीण या सामान्य महिलायें भी न तो इस विषय पर खुलकर बोल पाती और जागरूकता की कमी की वजह से ही उन तक मासिकधर्म से सम्बंधित कई महत्त्वपूर्ण जानकारी नहीं पहुँच पाती और न ही वो【 पेड 】इस्तेमाल की कोई जानकारी रखती हैं, औऱ【 पेड】उपयोग में न लाकर 【कपड़ा 】उपयोग करती हैं, जिनसे वे कई तरह के इन्फेक्शन और घातक बीमारियों की शिकार हो रही हैं!!!

©निशा रावल✍
छत्तीसगढ़

Image Source:bbc



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