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@dawriter

मां बेटी सा रिश्ता सांस बहू का

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परी इकलौती  संतान होने के कारण मां-पापा की लाडली , परी की हर एक  ख्वाहिश  पलक झपकते ही पूरी हो जाती। अपनी इच्छा अनुसार ही परी सब कुछ करती , अभी परी की पढ़ाई पूरी हुई ही थी कि उसकी बुआ परी के लिए अपनी नंनद के बेटे का रिश्ता लेकर आई , अभी परी  के पापा परी के सपने पूरे करना चाहते थे न की  परी की शादी  करना   चाहते थे पर परी की बुआ के जोर डालने पर वह  रिश्ता देखने गए परव और उसकी मां सुनीता जी से मिलने के बाद परी  के पापा को परव र्और उसका परिवार पसंद आ गया ,परव  के परिवार को भी परी पसंद आ गई।

फिर परी और परव की सगाई कर शादी की तारीख फिक्स कर दी गई। शादी के दिन जैसे जैसे पास आ रहे थे परी की मां को चिंता संतानें लगी की परी को तो घर का काम सही तरीके से नहीं आता कैसे परी सब जिम्मेदारी सभालेगी।

सगाई होने के बाद परी के व्यवहार में परिवर्तन आने लगा ,वह घर के कामों में रूची लेने लगी , थोड़ी गम्भीर भी हो गई थी।यह सब देख परी के परिवार वाले खुश थे।        शादी हुई, परी अपने नए घर आयी अपने साथ कई  तरह के डर लेेके बहुत  कुछ नकारात्मक सुन  रखा था  परी ने सांस और ससुराल वालों के  बारे में चिंता के कारण   वह पूरी रात नहीं सोई। सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर , पूजा कर अपनी  रसोई की तैयारी की सोचने लगी। क्या बनाऊ जो सबको अच्छा लगे, ...इस कशमकश में  थी की सुनीता जी रसोई में आकर बोली बेटा  तुम केवल एक मीठी रोटी बना कर रस्म  पूरी कर दो बाकी  सब  काम में देख लूंगी तुम आराम करो । सुबह अपनी सास को इस तरह देख परी समझ नहीं पा रही थी कि  सास  कैसी होती है जैसी उसने सुनी थी  या जैसी आज देखी ऐसे ही सोचते हुए परी की आखं लग गई और सुनीता जी ने खाने की तैयारी कर परी को खाने के लिए बुलाया सब कुछ परी की ही पसंद का गरम गरम रोटी बनाकर परी को देती जा रही थी और कह रही थी बेटा ढंग से खा ,अब तक परी ने ऐसी ही सास के बारे सुना था जो बहु की सौ बुराई करती और काम ज़रा भी नही करती और तो और किसी तरह भी बहू का साथ नहीं देती मगर जब परी ने अपनी सास का प्यार भरा व्यवहार देेखा तो सांस के प्रति उसकी धारणा बदल गई।

परी की शादी को साल हो  गया दोनो  ही माँ बेटी की तरह एक दूसरे की इच्छाओं का मान रखती ,एक दूसरे की हा मे हा और एक दूसरे की ना मे ना , दोनो एक साथ रसोई घर मे जाती एक साथ बाहर आती, एक ने रोटी बनाई तो एक ने रोटी सेखी ऐसा था उन दोनों का प्यार और आपसी समझ , इतना ही नहीं सुनीता ने परी को हर तरह आजादी दी , परी को हर एक काम बड़े प्यार से सिखाया और परी ने सुनीता जी की हर बात बड़े ध्यान से समझी कभी भी सुनीता जी की किसी बात का बुरा न माना ,परी के नौकरी करने आगे बढ़ने में पूरा सहयोग दिया  सुनीता ने जिससे परी का कैरियर बन गया। हर तरह घर और बाहर के कामकाज में परी को सहयोग दिया। मां बेटी सा रिश्ता बन गया सिर्फ सांस   के  थोडे से  प्यार और आपनतव से ।जो मां है किसी की वही तो सास है  पर एक बार  बहू की माँ बन के देखिये नई आई बहू को थोड़ा सा सम्मान और प्यार दे कर देेेेखिए बहू खुुुद ही बेेटी बन जाएगी।    अगर हर कोई सास सुनीता जी की तरह पहल करें तो ओर अपनी बहू को प्यार दे तो हर एक के घर रिशते बेहद खूबसूरत हो जाएंगे और बेटी के मां-बाप भी बिना किसी चिंता के सकुन से जी सकेंगे

      बस झूठे अहम और न झूकने की जिद्द मे सास बहू का पयारा सा रिश्ता खराब होता जा रहा है। कृपया कर सांस -बहू अपनी ज़िद छोड़ प्यार को बड़ा अपना रिश्ता खुशहाल बनाए।

      लेख पढ़ने के लिए आपका आभार । अगर लेख अच्छा लगे तो लाइक और कमेंट, शेयर भी जरूर करें

 धन्यवाद आपका

   



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