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@dawriter

महिला विश्व कप 2017

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gairolabharat by  
gairolabharat


कप फ़िरंगिनियो ने जीता,लेकिन देश का दिल मिताली राज,झूलन गोस्वामी, हरमीत कौर समेत भारत पुत्रियों ने जीता

 

एक पुरूषवादी विचारधारा प्रधान देश,जहाँ आज भी दकियानूसी विचार धारा से महिलाओं को अबला समझा जाता है। भले ही वो आज के समय तक भारत के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति तक पहुँच गई,लेकिन सबसे खुशी की बात आज है,जिस देश में अभी बेटी को कोख में बचाने का अभियान चल रहा हो वहाँ की बेटियां क्रिकेट के विश्व कप के फाइनल में पहुंचे ,यह सर्वोच्च उपलब्धि है।

 

बाजार और मीडिया ने जिनके ऊपर कभी ध्यान नहीं दिया, और आपकी संस्कृति ने जिन्हें सिर्फ रोका और टोका, वो आज खेल रही हैं. जीत हार से मतलब नहीं, वो खेली ये सबसे जरुरी हैं.

दिल जीत लिया.

 

असल मे दिल जीता उन दो चेहरों ने ,जो शायद इतनी बड़ी शख्सियत होकर भी पुरुष क्रिकेट के बड़े सितारों के बीच उस लाइम लाईट में शायद ही अपनी कभी जगह बना पाई हों ,केवल कुछ चुनिंदा लोगों ने इतना नाम औऱ इनके कारनामे सुने हों वो नाम है आज भरतीय टीम की कप्तान मिताली राज,और झूलन गोस्वामी

 

मिताली राज जिनका 18 साल का क्रिकेट का कैरियर,विश्व के सर्वाधिक रन बनाने वाली महिला,दो विश्व कल फाइनल में कप्तानी करने वाली एक मात्र भारतीय कप्तान,और अनेकों उपलब्धि

 

झूलन गोस्वामी जिनका एक पेस गेंदबाज के रूप में 15 साल का कैरियर,विश्व के सर्वाधिक विकेट लेने वाली महिला


यदि महिला क्रिकेट का नाम आये औऱ इन दो का उल्लेख न हो ,ऐसा कभी सम्भव ही नहीं

महिला विश्व कप में हार कर भी जीत गया इंडिया ।

 

वेलडन 'टीम-मिताली' देश बदल दिया है तुम सब ने..

 

अब समय आ गया है ,देश के नेताओं को आगे आकर इस देश मे महिला क्रिकेट को पुरूष क्रिकेट की तरह एक तराजू में तोल कर इन बेटियों के लिये भी अच्छे मौके तलाशने होगे,ताकि अगला 2021 का महिला विश्व कप हमारा हो।।

Image Source : The Indian Express

 



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