84
Share




@dawriter

भूखें मरते हम

2 51       

पृथ्वी का प्रत्येक जीव अपनी भूख को शांत करने के लिए नित्य कड़ी मेहनत करता है। हर प्राणी अपनी भूख के लिए घुम्मकड़ बना हुआ है। प्रकृति अपने जीवधारियों की आवश्यकता अनुसार खाद्य सामग्री का निर्माण करती है। ऐसे में हम मनुष्य जाति भोजन को लगभग हर दिन बर्बाद कर देते हैं।

जिस कारण यह संतुलन बिगड़ता जा रहा है और लोग भूखे मर रहे हैं। जैसे कि गांधी जी ने कहा था,"Earth provides enough to satisfy every men's need, but not every men's greed." (पृथ्वी हर आदमी की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन हर व्यक्ति की लालच के लिए नहीं।)

यह चिंतन का विषय है कि कृषि प्रधान देश होते हुए भी हमारे यहां लोग भूख से मर रहे हैं। लोग समारोहों में आवश्यकता से अधिक खाना बनवाते हैं और भोजन बच जाने पर उसे फेंक देते हैं बजाय किसी गरीब को खिलाने के। ऐसे में आपका भोजन नहीं देश का अनाज बर्बाद होता है। समारोह तो कभी-कभी होते हैं, हम रोज अपने घरों में भी शेष बचे खाने को सड़क पर फेंक देते हैं। इंसान तो छोड़ दीजिए गाड़ियों के पहियों से कुचलने के बाद वो खाना जानवरों के खाने लायक भी नहीं बचता। हमारे ऐसे कृत्यों से उन भूखे लोगों की भूख मरती है जिनके हिस्से का वो खाना था और एक दिन इसी भूख को पेट में लिए वे भी भूखे ही मर जाते हैं। यह एक दिन या एक घर की बात नहीं है बल्कि यह बरबादी समय के साथ-साथ लोगों के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है।

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में जितना भोजन बनता है, उसका एक तिहाई भोजन बर्बाद हो जाता है। इंटरनेट पर एक लेख के अनुसार भारत का हर चौथा व्यक्ति भूखा सोने को मजबूर हैं। यह हमारे लिए बहुत शर्मनाक बात है। 118 देशों की विश्व भूख सूचकांक सूची में भारत का स्थान 97वां है (2016 के आंकड़े अनुसार)। प्राचीन काल में शास्त्रों में भी अन्न की बरबादी को जघन्य पाप माना गया है। इस लेख को पढ़ कर शायद कुछ लोगों के रोंगटे खड़े हो जाये किंतु कुछ समय बाद ठंडे पड़ जाएंगे। नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए यह कब तक चलेगा, हमें स्वयं की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाने ही होंगे।

हमें कुछ सुझावों को अपने जीवन में उतार लेना चाहिए जिससे खाने की बरबादी कम हो सके। सबसे पहला और कारगर सुझाव खाने को आवश्यकता से अधिक न बनाएं। यदि इस पर भी खाना बच जाये तो उसे प्रशीतक(फ्रिज) में रखें और गरीब या भिखारी व्यक्ति मिलने पर उसे खाना दें। आज लगभग सभी के घर में प्रशीतक होगा, सामान्यता उनके यहां तो अवश्य जो खाना फेंक देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि थाली में उतना ही लें जितना खा सकें। यदि समय रहते कोई जरुरतमंद व्यक्ति न मिले और खाना ख़राब हो जाये तो खाने को किसी पात्र में डालकर किसी जानवर को खिला दें। समारोह में खाना बचना स्वाभाविक है क्योंकि वहां खाने वालों की संख्या अनुमानित होती है। कुछ लोग सिर्फ व्यंजनों से ही पेट भर लेते हैं जिससे उनके हिस्से का खाना बच जाता है।

एक बात और कुछ लोग एक साथ दो-दो या तीन-तीन समारोह में सम्मिलित होते हैं जिससे वो थोड़ा-थोड़ा रह जगह खाते हैं, इससे भी खाना बर्बाद होता है, किंतु यहां दोष किसका है यह कह पाना मुश्किल है। लेकिन यकीन मानिए अगर हम योजनाबद्ध तरीके से दावत आयोजित करें तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। और उस पर भी यदि खाना बचे तो खाने को किसी आश्रम या संस्था से संपर्क कर उन्हें दे देना चाहिए।

चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर: 1098

उत्कृष्ट शुक्ला
(यह लेखक के अपने विचार हैं)
#utkrisht
#stopwastingfood



Vote Add to library

COMMENT