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@dawriter

बापू देख रहे हो ना?

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sunilakash by  
sunilakash

कविता---
बापू देख रहे हो ना?
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बापू !
देख रहे हो ना
अपने सपनों का भारत ?
तुम्हारी---
अहिंसा की मूरत
आकंठ रक्त में डूब चुकी है।
'सत्य के प्रतिरूप'
तुम्हारे तीनों बंदर
जाने किस भीड़ में
गुम हो गये हैं।
बापू !
तुम्हारा 'बेटा'
बड़ा मक्कार हो गया है।
वह जेबें भरता है,
नित नई माँगे करता है,
कर्तव्यों के लिये नहीं,
अब अधिकारों के लिये लड़ता है।
जिस देश का 'सौदा' करता है,
उसी की सौगंध धरता है।
क्या पूछा ?
भारत का नक्शा ?
उसे भारत नहीं तय करता,
उसे चीन तय करता है,
उसमें पाकिस्तान
अपने मनचाहे रंग भरता है।
लोकतंत्र तुम्हारा जख्मी है,
एक टाँग पर चलता है।
'स्वदेशीपन' बीमार है,
खून थूकता है,
कराहे भरता है,
आखिरी सांसे गिनता है,
बस देखना यही है---
कब मरता है ?


---सुनील आकाश

Image Source : india.com



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