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@dawriter

बच्चों का पेट पालने के लिए पुरुषों का काम करती महिलाएं

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anonymous dawriter by  
Anonymous

अक्सर यह कहते हुए सुना गया है कि एक औरत हमेशा घर संभालती ही अच्छी लगती है, घर के काम काज करना उसको सजा कर रखना, खाना बनाना व घर के सदस्यों की देखभाल करना ही‌ शायद उसका महत्वपूर्ण किरदार है जिसे वो दिल व खुशी से निभाना पसंद करती है। अपने पति के द्वारा कमाये गये पैसों से अपना घर बड़े तरीके से चलाना, कुछ बूरे समय के लिए जोड़ ‌कर रखने ‌का हुनर शायद सभी के हाथ‌ में होता है परंतु कई बार शायद जो हम सोचते हैं वह नहीं हो‌ पाता, किस्मत में कुछ ओर ही लिखा होता ‌है….जब गरीबी व बेरोजगारी का चांटा किसी भी परिवार ‌को पड़ता है ना तब हाथों में कंगन पहनने वाली‌ औरत स्वयम ही निकल पड़ती है अपना घर चलाने के लिए बाहर कमाने की राह पर, बड़ा ही कठिन होता है यह निर्णय लेना क्योंकि औरत के घर से बाहर काम के लिए निकल जाने पर हजारों ऐसी नज़रे होती हैं जो उसकी‌ इज्जत को तार तार करने के लिए सदैव तैयार रहती हैं उन नजरों से खुद को बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। साथ ही साथ अपनी हर खवाहिशों को दबाकर जीना पड़ता है जिससे घर में दौ वक्त की रोटी लायी जा सके।

वैसे आजकल की औरत को आगे बढ़ने के लिए रोकना कुछ असंभव सा होता जा रहा है पुरुष प्रधान देश औरत के आगे बढ़ने की उड़ान भरने वाले पंखों को काटना तो चाहता है लेकिन औरत इन सब कठिनाइयों से लड़ती हुई अपने अंदर आत्मविश्वास भरकर ऊँची उड़ान भर ही‌ लेती है। और तो और आजकल की महिलाएं पुरुषों से कम नहीं है व ना ही पुरुषों वाले काम करने में भी पीछे हटती हैं। हाल ही में एक खबर बड़ी सुर्खियों में रही कि‌ बांग्लादेश में एक मुस्लिम महिला मोसममत जैसमीन अपने तीनों बच्चों का पेट पालने के लिए रिक्शा चालक बनी, इस्लाम का हवाला देकर इस समाज में उसके सपने दबाने की पूरी कोशिश की लेकिन जब बात अपने बच्चों का पेट भरने की आयी तो उसने किसी की ना सुन व आगे बढ़ती गयी….शुरुआत में तो उसकी बड़ी आलोचना हुई कोई उसके रिक्शे पर नहीं बैठता था लेकिन धीरे धीरे लोग उसके इस काम की सराहना करने लगे व उसके आत्मविश्वास का सम्मान, आज वह बांग्लादेश में क्रेजी आंटी के नाम से जानी जाती है, व पाँच साल से रिक्शा चला रही है। उसके इस हौसले को हम दिल से सलाम करते हैं। उसके द्वारा बनाई गयी यह मिसाल दूसरी औरतों के लिए भी प्ररेणादायक है कि किसी भी काम करने से डरो मत,बस आत्मविश्वास रखकर आगे बढ़ते चलो।

इसी प्रकार की और भी काफी महिलाएं हैं जो अपना घर चलाने के लिए भीखं मागने से जयादा बेहतर खुद मेहनत करकर कमा कर खाने में यकीन रखती हैं। हमें अपने आसपास ही ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल जाते हैं जैसे कि घर में काम‌ करने वाली बाईयों को ही देख लीजिए, वह अपना घर चलाने ‌के लिए झूठे बरतन व गंदगी तक साफ करती हैं चाहे तो वो भी भींख मागकर अपना गुजारा कर सकती हैं लेकिन इस प्रकार की अपमानित जीवन जीना शायद उनको पसंद नहीं होता तभी मेहनत करके इज्जत की रोटी खाने में गर्व महसूस करते हैं वह लोग ।

हमारे देश में भी काफी महिलाएं पुरुषों वाले काम करने में तत्पर होने लगी हैं, काफी महिलाओं ने ई-रिकशा भी चलाना शुरू कर दिया है वह भी बड़े गर्व के साथ….ऐसी महिलाओं को देखकर ही शान महसूस होती है कि हमारे भारत की महिलाएं भी आगे बढ़ती जा रही हैं व नाम रोशन कर रही हैं। साथ ही साथ अगर पुरुष मजदूरी का काम‌ करता है तो उनकी महिलाएं भी इस काम में पूरा पूरा सहयोग देती हैं, चाहे धूप हो या ठंड अपने छोटे छोटे बच्चों को अपने साथ रखते हुए वह अपने पति के साथ मिलकर यह काम करती हैं।

मेरे स्वयं के घर मे एक फिजियोथेरेपिसट आती है, उसके पति का शादी से पहले ही अफेयर‌ था‌, लेकिन उसके पति ने उनसे शादी करकर दौ बच्चे पैदा करके छोड़ दिया आज वह मेहनत करके पैसा कमाती है‌ अपने बच्चों का पेट पालती‌ है। वह खुशी होती है कि वो अपने बच्चों के लिए बाहर जाकर मेहनत करती है….इसी प्रकार पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंटस व अन्य कई जगहों पर औरतें पुरुषो वाले काम करती हुई दिखाई पड़ती हैं।

जब बच्चों व घर की जिम्मेदारी केवल आदमी ही‌ नहीं औरत‌ के कंधो पर भी‌ पड़ती है तब औरत अपने आत्मबल व आत्मविश्वास से ऐसी हर जिम्मेदारी को‌ उठाने के लिए सदैव तत्पर रहती‌ है व उसके इसी प्रकार ‌के उठाए गये कदम उसे सम्मान का भागीदार बनाते हैं….अच्छा लगे तो कृपया लाइक करे व अपने विचार जरुर सांझा करे….धन्यवाद ।

 



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