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@dawriter

प्यारा रिश्ता .... सास बहू का

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Soma Sur by  
Soma Sur

बेटी,बहू ,पत्नी और मॉ की जिम्मेदारियों को निभाने के बाद अब मेरी सास बनने की बारी है। बेटे ने अपने लिए जीवनसाथी ढूंढ ली है। सोचा था, उसके लिए लड़की मै ढूंढगी पर फिर मैने खुद को समझाया कि मै भी तो उसकी पसंद की ही लड़की ढूंढती। अच्छा है उसने ही चुन ली, वरना हमारे पड़ोसी शर्मा जी को अपने बेटे के लिए 2 साल तक लड़की ढूंढनी पड़ी थी। जब सुधा (हमारी होने वाली बहू) को पहली बार देखा तो बड़ी खुशी हुई कि मेरे बेटे ने इतनी अच्छी लड़की पसंद की। लेकिन ये खुशी थोड़ी देर मे ही काफूर हो गयी। मेरी बहन ने सुनते ही कहा," बस.... दीदी, सुंदर लड़कियाँ तो अपने रूप रंग के घमंड मे ही रहती है।" मैने कहा,"नही नहीं बहुत पढ़ी लिखी, MNC मे जॉब करने वाली है सुधा।" इतना सुनते ही वो बोली फिर तो दीदी आप को किचन से कभी छुट्टी नहीं मिलने वाली ।

सुधा को देखकर जितनी खुशी हुई थी बहन की बातों से ठंडी हो गई। फिर शुरू हुई शादी की shopping। मेरा बेटा जिसने कभी अपनी शर्ट नहीं खरीदी थी, बड़े शौक से सुधा के कपड़े खरीदने लगा। मुझे बहुत अच्छा लगा, चलो जिम्मेदार हो रहा है मेरा बेटा। पर साथ मे गई मेरी बेटी ने हँसकर कहा," देखा मॉ, भाई को तो कभी हमारे लिए कपड़े लेने नहीं आये अब तो सुधा के complexion से match करके dresses ले रहा है।" अचानक ही मन उदास हो गया सच ही तो कह रही है बेटी ,जब भी shopping के लिए कहती तो वो हमेशा बहाने बना देता था। मै क्या करूँगा जा कर? मेरे समझ नहीं आता। कितना time लगाते हो आप लोग। ये सारी बातें सुनने से अच्छा था कि मै अकेले ही चली जाया करती थी। और देखो तो अब कैसे कर रहा shopping, office से leave लेकर।

बस अब तो रोज की बाते हो गयी जो भी सुनता बेटे की शादी होगी मेरे लिए उनकी आँखो मे तरस साफ दिख जाता। और सबकी बाते सुन सुन कर मेरे मन मे सुधा के लिए प्यार से ज्यादा नफरत घर करने लगी। मुझे भी अब लगने लगा बहु मेरे बेटे को मुझसे दूर कर देगी। ये बातें मैं किसी से कह नहीं पा रही थी क्योंकि मन तो ये जानता था कि मैं गलत हूँ। अब शादी को सिर्फ 2 दिन बचे थे। करने को इतना काम था पर मन ही नहीं कर रहा था कुछ करने को।

शाम को बेटे ने आकर बताया मॉ सुधा बहुत upset है, मुझे कुछ बता नहीं रही आपसे बात करना चाहती है। मैने कहा ठीक है। मैं उससे मिलने चली गयी। उसने मेरे पैर छु़ये फिर गले से लिपट गई एक छोटे से बच्चे की तरह। काफ़ी देर तक इधर उधर की बाते करने के बाद वो बोली ,"मम्मी जी मैं बहुत परेशान हूँ। जो भी मिलता है वो डरा जाता है, सास ये कहेंगी, सास वो कहेंगी। सास को ये बात पसंद होगी सास को वो बात नापसंद होंगी। मुझे बहुत डर लग रहा है।

मैं तो आपकी बेटी बनकर आपके घर आना चाहती हूँ। जब मैं गलती करूँ आप मुझे डाँटे। जब मैं कुछ अच्छा करूँ आप खुश हो जाएं। जैसे मैं अपनी मॉ को हर बात बताती हूँ वैसे ही आपको भी बताऊँ। मैने उसे आगे कुछ भी कहने नहीं दिया। उसका हाथ थामकर कहा," बेटा ऐसा ही होगा। न तो तू मेरी बहु होगी ,न तो मै तेरी सास। तू एक मॉ के घर से दुसरे मॉ के पास आ रही है।" वो फिर से मुझसे लिपट गई।

घर वापस आते हुए मै सोच रही थी कि जैसा मेरे साथ हो रहा था वही सब सुधा के साथ भी हो रहा है। मेरे बेटे के पैदा होने के बाद से ही मैंने सोच रखा था जो भी गलत मेरे साथ हुआ था वो मैं अपनी बहू के साथ नहीं करूँगी पर मैं उसी रास्ते पर चलने लगी थी। हमारे हितैषी अनजाने ही पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो कर अपनी सोच हम पर थोप देते हैं।

कोई भी बहु घर तोड़ने का सोच कर शादी नहीं करती और न तो कोई सास, बहु को सताने को ही जीवन का ध्येय समझती है। हम पहले से ही अपनी सोच बना लेते हैं बहु है तो ऐसा ही करेगी, सास है तो ऐसा ही करेगी। फिर गलतफहमियों की वजह से वही सारी बातें सच हो जाती हैं। पर मैने अपने आप से और सुधा से वादा किया है, मैं गलतफहमियो की वजह से हमारे इस प्यारे से रिश्ते को खराब नहीं होने दूंगी।



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