0
Share




@dawriter

नींद से जागो… हर एक‌ खुबसूरत महिला के लिए

0 0       

2018 एक नया साल,एक नयी शुरुआत, मन में नया उत्साह व उमंग लिए खुद के लिए कुछ करने की सोच लेकर आता है। हम में से हर कोई नये साल में खुद के अंदर कुछ नया बदलाव लाने की कोशिश करता है,जिसमें कुछ सफल हो जाते हैं तो कुछ की कोशिश थोड़ी सी विफल हो जाती है..

खैर, कोशिश करते हैं यही सबसे बड़ी सफलता की बात है। लेकिन एक बदलाव कि जो कि मुझ जैसी हर महिला को खुद में लाने की बेहद आवश्यकता है वो हैं “नींद से जागने की” यहाँ मेरा अभिप्राय यह नही है कि हम महिलाएँ सोती ज्यादा है,जिससे कि घर के कामों व अन्य कामों में रूकावट पैदा होती है,क्योंकि अपनी जिम्मेदारियों के चलते ज्यादा नींद लेना भी शायद हमारे हक में नही है,इस प्रकार का सोना तो केवल रात में ही सम्भव हो‌ पाता है। यहाँ नींद से जागने की बात कहकर मैं अपनी जैसी हर महिला को खुद के लिए जागृत होने की बात कह रही हूँ,हम अपना जीवन नींद में ही तो बिता रहे हैं शायद,खुद के लिए अपनी सोच को बदलना व खुद के लिए चुप्पी तोड़ने के लिए खुद में ही बदलाव लाकर पहला कदम उठाने की बात कहना चाहती हूँ मैं|

जितना भी जीवन अब तक व्यतीत किया है‌ वह सोकर ही तो बिताते आये है हम,अब तक के जीवन के सफर में कौन सा ऎसा दिन आया है जिस दिन को हमने अपने लिए जीया है??कौन सा ऎसा दिन रहा है‌ जब हमने खुद के लिए समय निकाल कर खुद से बात करके अपने मन में चल रही उथल-पुथल व परेशानियों का हल निकाला हो??घर‌- गृहस्थी व बच्चों की चहल- पहल‌ से कुछ समय के लिए दूर जाकर यह सोचा है‌ कि आज जिस जगह पर मै‌ हूँ यहाँ तक आते आते मैं अपनी पहचान तक शायद पीछे छोड़ आयी हूँ तो क्या जीवन के इस मुकाम तक‌ पहुँच कर मैं खुद से खुश हूँ??कभी शायद मैंने खुद से यह नही पूछा होगा कि मैं कैसा महसूस कर रही हूँ?? क्यों ठीक कह रही हूँ ना मैं??शायद हाँ,क्योंकि मैं खुद इस स्थिति से गुजरती हूँ ।

लेकिन अब नही,अब नींद से जागने का समय आ चुका है। हमें खुद में बदलाव लाने का पहला कदम ‌उठाना पड़ेगा.. अब मैं खुद से दिन में समय निकाल कर पूछना चाहुँगी कि मैं कैसा महसूस कर रही हूँ, किसी बात से अच्छा महसूस होने पर खुश व मन में किसी बात की उथल पुथल होने पर एकांत में बैठकर उसे शांत करूँगी। आस पड़ोस, रिश्तेदारों या फिर अपने ही परिवार के किसी सदस्य के कुछ कह जाने पर ऎसी बातों को आजतक अपने मन में रखकर खुद को ही परेशान करती आयी हूँ मैं व ऎसा करके मैंने सिर्फ अपना ही नुकसान किया है,,बस अपना ध्यान बदलने के लिए मैंने टीवी व मोबाइल का सहारा तो जरूर लिया है लेकिन इस तरह मैंने अपनी नकारात्मक सोच को ही बढ़ावा दिया है जो कि मेरा नींद में रहकर जीवन जीना ही तो रहा है।

मेरी खुद से भी कुछ अपेक्षाएं हैं,यह जीवन मेरा खुद का है….अब मैं एक एक पल को खुश रहकर बिताना चाहूँगी। मैं कैसा महसूस करती हूँ यह सोचूँगी….अपने मन की शांति के लिए कुछ समय आँख बदकर ठंडी सरसराती हवा व चिड़ियों की मधुर चहचहाहट महसूस करुँगी ताकि अपने मन को स्थिर कर पाऊँ। किसी के कुछ कहने पर,परिवार में कदर व प्रशंसा न होने पर मन में भूचाल लाने की बजाय यह सोचूँगी कि क्या यह विचार इतने अहमियत रखते हैं जिन्होंने मेरे मन व मेरी जिंदगी को‌ विचलित कर दिया है,,हर बुरी बात को अच्छी बात में बदलने की कोशिश करूँगी,,दूसरों से अपनी बातें शेयर करके अपना मज़ाक बनवाने की बजाय खुद से उनका हल निकाँलूगी,,व अपने शरीर से प्रेम करूँगी उसका ध्यान रखू्ँगी। शुक्रिया करूँगी अपने भगवान का जिसने मुझे औरत का रूप देकर मुझे हर समस्या से लड़ने की शक्ति प्रदान की है।

एक एक पल कॊ खुशी से जीना चाहूँगी क्योंकि यह खुशी से जीया गया पल से ही मेरे जीवन में बदलाव आएगा व जिंदगी अपने आप सुंदर रास्ते पर निकल जाएगी,बस देर है तो केवल नींद से जागने की।

धन्यवाद ।

मोना कपूर



Vote Add to library

COMMENT