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@dawriter

देश-सेवा

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SHIKHA SRIVASTAVA by  
SHIKHA SRIVASTAVA

वंश की माँ स्वाति उसे अक्सर वीर स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियां सुनाया करती थी। उन कहानियों का वंश पर ऐसा असर हुआ कि उसने दृढ़ निश्चय कर लिया कि बड़ा होकर वो भी सेना में शामिल होकर देश की सेवा करेगा।

देखते-देखते वो दिन आ गया जब वंश सेना भर्ती की परीक्षा देने गया। लिखित परीक्षा में तो वो उत्तीर्ण हो गया लेकिन शारीरिक मापदंड में कुछ कमी के कारण सेना में उसकी भर्ती नही हो पाई।

वंश बहुत निराश था।

तब स्वाति ने उसे समझाया- बेटे, जरूरी नही देश की सेवा सेना में भर्ती होकर ही कि जाए। और भी बहुत तरिके है।

वंश ने पूछा- क्या तरीके माँ?

तब स्वाति ने समझाया- तुम जो भी काम करो ईमानदारी से करो, बेईमानी से दूर रहो। सामाजिक संपत्ति को नुकसान मत पहुँचाओ, गंदगी मत फैलाओ। हरसंभव जरूरतमंद लोगों की मदद करो और लोगों को भी जागरूक करो। इस तरह एक अच्छे नागरिक बनकर तुम देश की सेवा कर सकते हो।

वंश ने स्वाति की बात गांठ बांध ली। इन बातों पर अमल करने के साथ-साथ वो नौकरी की तलाश में भी लग गया।

कुछ वक्त के बाद वंश को एक अच्छी नौकरी मिल गयी। अपने वेतन का एक निश्चित हिस्सा वो हर महीने अस्पताल में गरीबों के इलाज और अनाथालय में देने लगा। छुट्टी के दिन वो अक्सर अस्पताल, अनाथालय, वृद्धाश्रम जैसी जगहों में जाकर लोगों की सेवा करता।

अनाथालय के कुछ बच्चों को लेकर वंश एक दिन घुमाने ले गया। सब बच्चे बहुत खुश थे और मस्ती कर रहे थे कि तभी वहां एक जोरदार धमाका हुआ। अफरा-तफरी मच गई चारों तरफ। देखते-देखते इमारत आग की लपटों में घिर गई। सब बच्चे घबराकर रोने लगे।

वंश ने उन्हें किसी तरह संभाला और अपनी परवाह किये बिना उन बच्चों को सुरक्षित बाहर लेकर आया।

अंदर अभी भी कुछ लोग फंसे हुए थे। पुलिस उन्हें निकालने में जुटी थी। वंश भी उनकी मदद के लिए पहुँच गया और सभी लोग सुरक्षित निकल आये।

थोड़ी चोट आने के कारण वंश को अस्पताल जाना पड़ा लेकिन उसे इसका कोई गम नही था। उसे खुशी थी कि उसने एक नेक काम किया था।

कुछ दिनों के बाद खबर आई वंश को सरकार की तरफ से वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है।

पुरस्कार लेते हुए वंश ने कहा- मैं हमेशा से देश की सेवा करना चाहता था, किसी पुरस्कार के लिए नहीं बस इसलिए कि मेरा नाम भी देशभक्तों में आये। मेरी माँ ने मुझे सही राह दिखाई, तब मै समझ पाया कि देश सेवा के लिए सेना में जाना जरूरी नही है।

मेरी माँ के कारण आज मैं अपने देश का वीर सिपाही बन पाया हूँ, इसलिए इस पुरस्कार पर उनका हक ज्यादा है।

स्वाति को सम्मान के साथ स्टेज पर बुलाया गया।

पुरस्कार लेते हुए उसकी आँखों में गर्व की चमक थी अपने वीर सिपाही बेटे की बदौलत।



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