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@dawriter

जवान होते भारत में बुजुर्गों के लिए कोई आदर नहीं?

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तारीखे सारी जवाँ हो गयी है...

सुना है कैलेँडर को अठारवां साल लग गया है...

पहले कहा जाता था बच्चे बढे होते जाते है ओर माता पिता छोटे,और जब बच्चे जावान हो जाते है तो बच्चे बन चुके बूढे माता पिता उनके लिए घर का अनयूसड समान हो जाते है.

ये कैसा जावान भारत है जिसे अपने जडो़ से प्यार नहीं,ये वो बूढी होती पीढी को कैसे इतनी बुरी हालत में छोड़ देता है कर्नाटक में एक बेटी ने अपने 90 साल के पिता और 80 साल की मां को घर से निकाल दिया जिससे दंपति को मजबूरन हुबली बस स्टैंड पर रहना पड़ा दो दिनों तक सड़क पर रात गुजारने के बाद जब पुलिस को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने मदद करते हुए बुजुर्ग दंपति को सरकारी वृद्धाश्रम पहुंचाया ,क्या एक पल के लिए भी लड़की को अपने ठड़ के दिन याद नहीं आये होगें कि कैसे उसके माता पिता उसके बार बार कंबल हटा देने पर भी,उस रात भर ढकते थे ठड़ से बचाते थे,आज उसी माता पिता को सदियों की वाली रात बस स्टैड़ पे गुजारनी पड़ी ठंड से कांपते हुए.

कहाँ गए वो कांति वाले मैसेज करने वाले कि यदि लड़की को माता पिता को रखने का अधिकार होता तो वृध्दाआश्रम न होते.

कैसा जावान भारत है जो चार महीने अपनी माँ को बैन हैमरेज से पीडित होने में सेवा करने की मजबूरी से बचने के लिए धक्का दे देता है उसी माँ को जिसने नौ महीने अपनी कोख में रख कर पाला. उस बेटे को जिसने पेट के अंदर से लात मारी और अब जीवन में भी. गुजरात के राजकोट, एक बेटे ने अपनी बुजुर्ग और बीमार मां को छत से फेंककर मार डाला. बेटा असिस्टेंट प्रोफेसर है. ये कैसी पढाई? 

कोई भी व्यवहार करने से पहले याद रखिये आप कोई जादुई झरने का पानी पीकर नहीं आए है जो बूढे नहीं होगें. आप के बाल भी एक दिन सफेद होगें,चेहरे पर झुर्रियां आयेगीं, शरीर साथ नहीं देगा,एक दिन आप भी अपनी औलाद का सहारा ढूंढेगे, इसलिए खुद का भविष्य उज्जवल करना चाहते है तो आज को बचाईए...वरना हमारे जमाने के अधिकतर बच्चे माता पिता ने घर पर रखकर पाले थे तब ये परिणाम है कि वृध्दाआश्रम की बाढ आयी है, फिर आज तो हम बच्चे को डेकेयर, बोडिग स्कूल या आया के भरोसे भी पाल लेते है. 



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