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@dawriter

ऐ खुदा तू ही बता. . !

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ऐ खुदा तू ही बता तू है कहाँ?
एक दूसरे से तेरे चाहने वाले हैं लड़ रहे यहाँ,
कोई बाप से कोई माँ से बहन से हो रहा जुदा,
ऐ खुदा तू ही बता तू है कहाँ?

नफरतों की नहर है चौतरफा बह रही,
खून के उफ़ान में है धरा भी तड़प रही,
तलवार बन मेरी कलम मुझसे है पूछ रही,
सर कटा क्यों रक्षकों का क्यों रूह तेरी ना रो रही,
रक्त रोकने रक्षकों का कब तू आएगा यहाँ ?
ऐ खुदा तू ही बता तू है कहाँ?

कोई मर्दानी अपनी माँग के सिन्दूर को तड़प गयी,
इक वीर पुत्री बचपन के वात्सल्य से वंचित रह गयी,
कुछ सपने थे उस माँ के जिन्हें आंसुओं से वो धुल गयी,
इक बाप की गर्वित ख्वाहिशें पल-भर में धूलि-धूसर हो गयी,
उसे चाहने वालों के दर्द को शब्दों में कैसे करूँ बयाँ?
ऐ खुदा तू ही बता तू है कहाँ?

राष्ट्र-ऋण से मुक्त होने को सरहद पे हो गया फ़ना,
संसार के हर सुख से खुद को कर दिया जुदा,
देश की हर सांस बचाने में उसकी साँसे भी थम गयी,
गोलियों से जर्जर वो काया अपनी रूह से अनासक्त हो गयी,

उस वीर की कुर्बानी को कैसे मै भूल गया,
उसकी दी ज़िन्दगानी पर क्योंकर घमंडी हो गया,
ना क़द्र की उसके शहादत की ना कभी उसे सम्मान दिया,
उस वीर के मान को इस कदर क्यों ठेस पहुँचा दिया,
मान बढ़ाने शूरवीरों का कब तू आएगा यहाँ?
ऐ खुदा तू ही बता तू है कहाँ?

---शिवम् तिवारी

Image Source : The Indian Express



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