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@dawriter

उड़ान

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udyalkarai by  
udyalkarai

उड़ना चाहती हूँ इस खुले आसमान में
उन परिंदों की तरह
अपनी मंजिल को छुने की
ख्वाहिश लेकर...


क्यों रोक लेता है फिर कोई
इस उड़ती चिड़ियाँ को
क्यों बंद कर देते हो अपनी सोच के
इस छोटे से पिंजरे में..


कैद कर देते हो उस बेजुबान पंछी को जैसे
कोशिश न करना मुझे कैद करने की...


पिंजरे को तेरे तोड़ कर निकल जाऊँगी
देखना फिर मुझे
उस खुले आसमान में उड़ती हुयी नज़र आऊँगी।
.



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