0
Share




@dawriter

आजादी

2 4       

काश मेरी आजादी ऐसी हो


मेरी सोच में किसी का दबाव न हो,
मेरी उड़ान में किसी का पांव न हो,


मैं उड़ू नील गगन में,
तो जबरन किसी की छांव न हो,


दिल खोलकर लिखूं अपनी कलम से
मेरी कलम पर किसी का प्रभाव न हो


काश मेरी आजादी ऐसी हो।

© उत्कृष्ट शुक्ला



Vote Add to library

COMMENT