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@dawriter

अस्तित्व : women struggle after marriage

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ये ससुराल शब्द ही बेहद अजीब है दोस्तों .. पिया को छोड़ सब कुछ नीरस।... आज केवल स्त्रियों के मन की बात करते हैं।

हर लड़की अपनी शादी के और पिया के हसीन सपने देखती है कभी प्रेम की छुअन तो कभी अपनी गृहस्थी बसाने का अरमान अपने सपनो के घर को सजाने की हसरतों के संग उसने बहुत कुछ जिया होता है... अपने सीने की हर धड़कन पर उस अनदेखे अनजाने राजकुमार का नाम लिख ,खुद को उसकी अमानत मान कर ,एक चंचला ने जाने कितने प्रणय निवेदन ठुकराए होते हैं...! तो कभी किसी खास सखी के विवाह के अवसर पर हर रस्म में खुद की कल्पना को साकार किया होता है..! माँ की हर नई साड़ी में खुद को सजा कर घूंघट कर भावी दुल्हन बनने का स्वप्न...और आईने में खुद को निहार कर खुद में ही लजा जाने का वो अल्हड़ पन ...कोई कैसे भूल सकता है..! कितना मासूम होता है एक लड़की का वो सब सोचना और कल्पना महल में विचरण करना..! कल्पना-महल इसलिए कहा क्योंकि वास्तव में विवाह के बाद ऐसा कुछ भी नहीं हो पाता जीवन की सच्चाइयों से जब एक लड़की का सामना होता है उसके कांच के सपनों के टूटने का समय आ जाता है और एक-एक करके उसकी प्रत्याशा टूटने लगती हैं याद है जब हम क्लास ट्वेल्थ में होते है ,उस वक्त यौवन की दहलीज पर खड़े मन में हजारों तमन्नाओं के जन्म लेने की प्रक्रिया कितनी सुखद होती है किंतु किसे पता होता है यह तो सिर्फ तमन्नाएं होती है कभी-कभी ही पूरी होती हैं , हो सकता है कि किसी-किसी को भाग्यवश अच्छी ससुराल अच्छा पति और सम्मान करने वाला व्यक्ति मिल जाता है ,किंतु क्या सबके साथ ऐसा होता है?... यदि आप एक पार्टी में शामिल हुई 10 औरतों के समूह में यह सवाल पूछे तो 10 में से 7 का उत्तर यही होगा कि उन्हें अपने विवाह में निराशा ही हाथ लगी शायद 3 अपने सुखी जीवन के विषय में बताएं और आपकी बात का अपवाद करें... मुझे तो ऐसा लगता है कि कि जो स्त्रियां घर परिवार ससुराल मायका सबको साथ लेकर चलना चाहती हैं संभवत वही सबसे अधिक झेलती है ...!

और सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब सपनों के राजकुमार के द्वारा बात-बात पर अपमान और तिरस्कार मिलने लगता है, तो उस भावुक हृदय में वेदना ने जन्म ले लेती है.. प्रेम के कितने रूप होते हैं आकांक्षा के रूप में, उल्लास के रूप में ,खुशी के रूप में.... फिर वह भी वक्त आता है जब प्रेम पति के नाम से जुड़ कर मिलता है विवाह के पूर्व होने वाली बातचीत में मिलता है फिर विवाहोपरांत यही प्रेम साकार होकर स्पर्श के रूप में मिलता है...! और फिर कुछ ही दिनों में इस प्रेम का स्वरूप बदलने लगता है स्त्री को प्रेम नहीं, सिर्फ व्यंग ,ताने ,उपहास ,उलाहनाए और उपेक्षाएं मिलने लगती हैं ..? आखिर क्यों ? विवाह के पूर्व जो व्यक्ति और भविष्य का जीवन साथी उससे इतने प्रेम पूर्वक व्यवहार करता है वही विवाहोपरांत क्यों उससे बात करने का लहजा बदल देता है क्यों वह उसे दासी समझने लगता है..! क्यों उसमें अनुराग की कमी हो जाती है ? क्यों परस्पर झगड़े बढ़ जाते हैं ...क्यों तब मां पिता जी बहन भाई को लेकर पति और पत्नी में विवाद हो जाते हैं ? क्यों पत्नी की प्रत्याशियों पर खरे नहीं उतर पाते हैं पति ? आखिर इन सब का कारण क्या है शायद प्राप्त हो जाने के पश्चात वस्तुओं का महत्व खत्म हो जाता है.. और रिश्तो का भी...! जब तक वह युवती पत्नी न थी तब तक महत्वपूर्ण थी ..तब तो समय निकाल निकाल कर बातें करते थे ,आज घर पर इंतजार करती पत्नी के पास जल्द से जल्द पहुंचने की कोशिश क्यों नहीं होती ? और घर पर आकर भी प्यार के दो शब्द बोलने की जद्दोजहद क्यों नहीं होती ? क्यों कमी आ जाती है उन रिश्तों की गर्माहट में क्या बदल जाता है क्या प्राप्त वस्तु का महत्व समाप्त हो जाता है जबकि अप्राप्त अवस्था मे वही अमृत समान था..!

आज मैंने एक पार्क में घूमते हुए एक प्रेमी जोड़े का वार्तालाप सुना जहां प्रेमिका रो रही थी और प्रेमी उसे अलग हो जाने की सलाह दे रहा था ,कारण ...प्रेमी के बड़े भाई ने भी प्रेम विवाह किया था उसके भाई भाभी दोनों में बहुत ही प्रेम था और आज विवाह होने के उपरांत उसके भाई भाभी एक दूसरे की शक्ल नहीं देखना चाहते.." तो क्या वास्तव में यह प्रेम था ?और इसीलिए वह युवक भी अपनी प्रेमिका को यही समझा रहा था कि विवाह होने के बाद हम दोनों का भी प्रेम समाप्त हो जाएगा ..हम भी एक दूसरे को अखरने लगेंगे..!! इससे अच्छा है अपने प्रेम को जीवित रखने के लिए हम आज ही अलग हो जाएं.." क्या यह सोच उचित है ?

इस विषय पर मुझे तो जो बात समझ में आई वो यही थी कि स्त्री प्रेम के साथ-साथ सम्मान की भूखी होती है यदि हर पति अपनी पत्नी को प्रेम के साथ उचित मान सम्मान प्रदान करें तो पति पत्नी का यह रिश्ता सात जन्मों तक तो क्या जन्म जन्मांतर तक एक दूसरे को कभी भी उबाऊ ना लगे..! विडंबना यही है कि हमारे भारतीय समाज में स्त्री का दर्जा पति से नीचे ही माना जाता है आज स्त्रियां हर क्षेत्र में आगे तो सम्मान के मामले में क्यों पीछे हैं? और मेरा तो यह व्यक्तिगत अनुभव है कि " यदि पति आपको उचित मान सम्मान देता है तो आप स्वयं उससे एक दर्जा नीचे रहना पसंद करती हैं .."

और यदि वह बात बात में आपके आत्मसम्मान पर चोट पहुंचाएगा तब आपके भीतर एक विद्रोह का जन्म होगा हर स्त्री सम्मान और प्रेम की भूखी होती है, समाज सदैव स्त्रियों का शोषण करता है, घरों में स्त्री ही स्त्री का शोषण करती है सास के रूप में, ननद के रूप में, भाभी के रूप में, जेठानी या देवरानी के रूप में या किसी भी अन्य रूप में ..। मेरी तो ऊपरवाले से दुआ है ,सात फेरों के बंधन में बंधने के बाद जिन स्त्रियों को अपमान झेलना पड़ता है काश उनके पति अपनी गृहलक्ष्मी का सम्मान करें और उनकी खुशी का ख्याल रखें..!और यदि पति हर परिस्थिति में अपनी पत्नी के साथ है तो संसार की कोई भी शक्ति ,उसका अपमान करने तो क्या उसको भृकुटी तक टेढ़ी कर के देखने की हिमाकत भी नही कर सकती, फिर बुरा व्यवहार करने की हिम्मत तो कभी नहीं जुटा पाएगे लोग..! और पति पत्नी का ये अटूट रिश्ता जन्म जन्मांतर तक कभी न टूटने वाला सम्बन्ध हो उठेगा..! यदि आप की इच्छाओं का सम्मान करने वाले पति आपके भी पास भी हैं तो यकीन मानिए आप भी दुनिया की भाग्यवान महिला हैं..!

-कविता जयन्त श्रीवास्तव



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