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@dawriter

अपेक्षाएं या आत्मविश्वास

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nis1985 by  
nis1985

 

निशा की कलम से.......
अपेक्षाएं या आत्मविश्वास

अपेक्षाएं या फिर कह लीजिए उम्मीदें ....हम्ममम्म इस शब्द से शायद कोई भी अछूता रहे, ये इंसानी फितरत का ही एक हिस्सा है, पर ये जो उम्मीदें या अपेक्षाएं होती हैं ,अपनो से कितनी बढ़ जाती हैं ना!!!


अरे देखो तो मैंने इतना किया बदले में मुझे इतना कम मिला या बदले में मुझे कुछ भी नही मिला, और आज मैं इतनी प्रॉब्लम में हूँ ,मुझे उम्मीद है कि वो मेरी जरूर मदद करेंगे,उफ़्फ़फ़फ़फ़ ये उम्मीदें ......पर क्या करें कुछ ,उम्मीदें भी तो अपनो से ही होती हैं , पर कभी -कभी ये हमारे लिए बहुत ज्यादा ही दुखदायी हो जाती हैं जब तक आपके अपने आपकी सारी उम्मीदें पूरी कर रहे हैं तब तक आप बेहद प्रसन्न होते हैं , उनको लेकर आपके अंदर अतिआत्मविश्वास की भावना आ जाती है, पर ये क्या जहा कहीं हमारे अपने हमारी थोड़ी भी उम्मीद पूरी नही कर पाए तो हम दुखी हो गए, भला ये भी कोई बात हुई क्या,अरे भाई उनकी भी तो कुछ मजबूरी हो सकती है इस बात को हमें समझना चाहिए उम्मीदें पूरी नहीं करने पर क्या आपसी प्रेम खत्म हो गया.....बिल्कुल भी नहीं !!!!


हम्ममम्म तो बस यही बातें हमारे दुख का कारण बनती हैं और अगर जिसमे समझदारी की थोड़ी भी कमी है मतलब समझ लीजिए रिश्तो में अलगाव शुरू,और फिर आपसी रिश्तों में खटास!!!!


हम्म्म्म तो खुश रहना है तो उम्मीदें थोड़ा कम रखिये जितनी भी उम्मीदें हैं सिर्फ अपने आप से रखिये की नहीं मुझे ये काम तो पूरा करना ही है, और मैं कोशिश करूँ तो इसे पूरा भी कर सकती हूँ ,खुद में आत्मविश्वास फिर जिंदगी जीने का जो मजा आएगा उसका आनंद सिर्फ हम ही महसूस कर सकते हैं और कोई भी नहीं 👍😊

निशा रावल
बिलासपुर



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