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@dawriter

आप बदलिए समाज अपनी सोच अपने आप बदल देगा

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dhirajjha123 by  
dhirajjha123

इंसान खुशियों को खुद से अंदेखा कर देता है और फिर रोता है यह कह कर कि खुशियाँ गुम हो गई हैं मिल नही रहीं । अरे भई कहाँ से मिलेंगी उन्हें तो तुम खुद दफ़ना आए  । एक बाप परेशान रह सकता है अपनी बेटी की शादी को लेकर, मगर अपनी बेटी के मन का नहीं कर सकता, लोग हसेंगे समाज बुरा भला कहेगा ये सोच कर उस बेटी को नर्क भोगने पर मजबूर कर देंगे जिसकी खुशी के लिए पाई पाई जोड़ा और सोचा कि बेटी की शादी ऐसे घर में कराएंगे जहाँ वो खुश रहे । 
अरे यार जिसे शादी से पहले ही तुम्हारी बेटी को रखने के लिए लाखों रुपए चाहिए वो भला ख़ाक खुश रखेगा उसे । क्या एक पिता के कंधे इतने कमज़ोर हो गए कि उसे अपनी बेटी का बोझ हल्का करने के लिए किसी को पैसे देने पड़ें ? और समाज ये समाज आप पर हंसेगा, अच्छा ये बताइए इससे पहले समाज ने आपके सम्मान में कितनी मूर्तियाँ बनवाई हैं ? क्या आपको विश्वास है कि अपनी बेटी के मन का करने के बाद जिन लोगों का आपके खिलाफ़ बोलने का डर है आपके मन में उन्होंने इससे पहले कभी कुछ नहीं बोला आपके बारे में ? इतने नासमझ तो आप सब नहीं फिर ये नासमझी क्यों ? 
जानते हैं समाज हमेशा से अच्छा रहा है मगर इस पर जो कुरीतियों की जंग लगी है ना इसने खोखला कर दिया है समाज को, इसे ज़रूरत है हथौड़े के मार की, आपके जवाब की । अगर आप चोट नही करेंगे तो ये कुरीतियाँ एक दिन आपकी खुशियों को निगल जाएंगी । हर इंसान अपने ज़िंदगी सफ़र में एक साथी चाहता है एक ऐसा साथी जो उसकी सोच को समझे और जिसकी सोच आपकी समझ में आ जाए । 
क्या बुरा है अगर आपकी बेटी सामने से आपको अपने उस हमसफ़र का पता बता दे । आप कोशिश तो करिए उन्हें समझने की एक बार देखिए तो सही की वो किसका हाथ पकड़ कर आगे बढ़ना चाहती है । आप पिता हैं आप नहीं समझेंगे तो कौन समझेगा । आपका एक गलत फैसला कितनी ज़िंदगियां बर्बाद कर देगा आप सोच भी नहीं सकते और आपका एक समझदारी का फैसला कितनी ज़िंदगियां खुशहाल बना देगा इसका अंदाज़ा भी आपको नहीं होगा । बेटी बड़ी हो गई है आपकी और समझदार भी यकीन मानिए कभी ऐसा फैसला नसीं करेगी जिससे आप दुखी हों । आपकी खुशी उसकी खुशी में है तो एक बार उससे पूछिए कि वो किस में खुश है । 
आप खुद को बदलिए और फिर देखिए आप पर हंसने की धमकी देने वाला ये समाज अपनी सोच अपने आप कैसे बदलता है । 
धीरज झा



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