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@dawriter

पश्चाताप की ज्वाला -4

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sunita by  
sunita

पश्चाताप की ज्वाला -3 से आगे की कहानी ......

जीया अपने तीसरे बच्चे को देख खुश रहती ...वह बडा ही सुंदर गोल मटोल बच्चा था लेकिन इन सब में जीया की सेहत पहले से भी बदतर हो चली थी एक दिन हालत इतनी बिगडी कि अस्पताल में दाखिल कराना पडा। नन्नू व रिन्कू बच्चे को पूरी तरह संभाल रहे थे उनके पापा माँ के साथ अस्पताल में थे।

…..थोडे समय के लिए वह अस्पताल से घर आये तो रिन्कू व नन्नू ने जिद की कि वह भी माँ को देखने जायेगे वह कैसी है , उन्होने कहा कि यदि वह उनके के पास जायेगे तो निक्की को कौन संभालेगा रिन्कू ने कहा, “ मौसी संभाल लेगी पापा!” …..

“ मै उनसे नही कहूंगा उसे सिर्फ अपने बच्चे ती फिक्र है तुम लोगो की नही , तुम्हारी मां  की सगी बहन को तुम्हारी परवाह नही अपने बच्चे और पति की ही फ्रिक है।”

दोनो उदास हो गये उन्हे भी अब यह अहसास हो चला था पापा सच कहते है मां भी उन्ही की वजह से अस्पताल में है।

नन्नू जानता था कि इस बार मौसा जब मां को डॉ0 के इलाज  के बहाने ले गये थे तो मौसा ने मां अंधेरे कमरे में बन्द कर बहुत टार्चर किया था कहा था ,

“ दोनो बहनों को जान से मार डालुंगा अगर ससुर की जमीन जायदाद और बिजनेस को उसके नाम नही किया और यह भी कहा कि अगर मुंह खोला तो तो जीया के पति और बाप को ठिकाने लगा देगा।”

नन्नू ने सारी बातें चुपचाप सुनी थी वह बडा समझदार हो चुका था इसलिए अपनी बहन रिन्कू व निक्की का ध्यान रखता था उसे लगने लगा मौसा उसकी बहनों को भी मार डालेगा अब वह मौसा से दूर रहता व पापा की बात मानने लगा था रिन्कू वह कुछ नही समझती थी उसे बस मौसी की तरह ही बनना था। मां अस्पताल में थी कोई चिन्ता नही बस शीशे आगे खडी रहती अधिकतर। यह सब देख नन्नू बहुत गुस्सा करता , पापा का वक्त मां की देखभाल में जा रहा था ….इसी का फायदा रिन्कू ने उठाया छोटी बहन को छोड अपनी  सहेलियों के साथ घुमती फिरती पढाई से जी चुराती जबकि नन्नू बडे भाई का फर्ज निभा रहा था। पढाई के साथ साथ घर की जिम्मेदारी संभाल ली मां के लिए खाना बनाता , छोटी बहन निक्की की देखभाल करता वह उसका मां व बाप दोनो बन गया।

अस्पताल में मां की सीरीयस हालत देख , उसकी रूलाई न रूकी।       

जीया ठीक हो अस्पताल से घर वापस आ गया , बच्चों  की हालत देख वह दुखी हो गयी ...छोटी बच्ची निक्की इतने दिनों तक अकेली रही। वह बहुत कोशिश कर रही थी खुद को संभालने की लेकिन जो दुख छोटी बहन के  पति ने पंहुचाया उससे वह पूरी तरह टूट चूकी थी। अब उसका मन वहाँ रहने को न था पति रवीश को कहती है कि यहां नही रहना है वह कहते है मै ऑफिस में बात कर दूसरी जगह शिफ्ट करवा लूंगा वह खुद भी यहाँ नही रहना चाहते रीया व दीपक की कारगुजारियां उनके बरदाश्त से बाहर हो रही थी वह चाहते थे बच्चों को उनकी बुरी  संगति से दूर ले चलु।

जीया ने यह बात छिपा ली थी कि दीपक ने उसे कितना टॉर्चर किया था अब वह जब भी सामने आता , जीया को वही सब याद आने लगता उस घूर्त की मक्कारी को देख जीया अपमानित महसुस करती और उस घडी को कोसती जब पिता को रीया के घर से भागने के बाद वापस बुलाने पर उन्हे मजबूर किया था अनशन कर उसके ऐसा करने से आज उसका खुद का परिवार परेशानी में अा गया वह क्या करती पश्चाताप और मानसिक सदमें से उबर पाना उसके लिए मुमकिन न था यही वजह थी उसके बार बार बीमार होने की जीया  का मन अब इस घर में एक पल के लिए भी नही लग रहा था।

रवीश ने जीया को बताया कि उन्होने अपना तबादला दूसरी जगह  कम्पनी में करवा लिया है, अब यहाँ से चलने की तैयारी करों। जीया खुश हो गयी उसे व उसके बच्चों को दुष्ट दीपक व उसी के रंग में रंगी चालाक बहन की शक्ल कभी नही देखनी पडेगी लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।

जब पिता को पता चला तो उन्होने कोहराम मचा दिया मिट्टी को तेल पूरे घर में छिडकने लगे उन्हे होशों हवास न रहा  जीया व रवीश को वह अपने से दूर जाते नही देख सकते थे ...चीखने लगे यदि वह यहाँ से जायेगे तो पूरे घर को आग लगा देगें यह घर रवीश और उनकी बेटी जीया का है, रीया तो उनके लिए उसी दिन मर गयी थी जब वह उनकी इज्जत की धज्जि़याँ उडा इस अवारा दीपक के साथ भागी थी इन दोनो का कोई हक नही है यदि जीया ने जिद न की होती तो वह उसे कभी यहाँ नही आने देते ...पिताजी का यह रूप देख सभी सकते में आ गये। जीया व रवीश ने बहुत समझाने की कोशिश की वह बच्चों की पढाई को देखते हुए दूसरी जगह शिफ्ट कर रहे है उनसे मिलने आते रहेगें कोई फायदा न हुआ पिताजी की जिद के आगे रवीश और जीया को झुकना पडा। पिता की आँखों के आँसुओं ने दोनो के पैरों में बेडी डाल दी।

जारी है 

पश्चाताप की ज्वाला -5 में 

पश्चाताप की ज्वाला -3

पश्चाताप की ज्वाला पार्ट-2

पश्चाताप की ज्वाला-I

सुनीता शर्मा खत्री ©



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