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@dawriter

पश्चाताप की ज्वाला -3

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sunita by  
sunita

रीया की आदत थी बात बात पर ताना देने की, “ दीदी बीमार हुई तो दीपक ने ही उनका इलाज करवाया जीजा जी तो विदेश में ऐश कर रहे  थे जबकि दुख तकलीफ दीपक ने बरदाश्त की! ” उसकी यही बातें दीदी को चोट पंहुचाती न जाने रीया इतना कैसे बदल गयी वह अक्सर यही सोचती कि यही वह उनकी छोटी बहन है जिसकों उसके जीजा व उसने इतना प्यार दिया दीपक से शादी के बाद वह बिल्कुल ही बदल चुकी थी।

नन्नू रिन्कू मौसा मौसी के कहने में रहते तो तो दीदी जीजा अपना सारा प्यार रीया के छोटे बच्चे के ऊपर लुटाते रहे वक्त बीतता रहा।

अचानक जीया की तबियत बहुत  खराब हुई दोबारा तो दीपक व रीया ने उसी डॉ0के पास जाने को कहा जहाँ जीया का पहले इलाज हुआ था, जीया के पति रवीश नेे मना कर दिया  वह अब अपने आप ईलाज करवायेंगे। वह रीया के तानों को अपने कानों से सुन चुके थे।

रीया  और दीपक ने जब दीदी की तबियत खराब देखी तो पिता पर जोर डालने लगे की उसी डॉ0 को दिखायें जहाँ पहले इलाज से वह ठीक हो गयी थी। इस बात के लिए उन्होने माँ व पिताजी को अच्छी तरह समझा दिया वह भी राजी हो गये क्योकि पहले भी  जीया दीदी की तबियत सही हुई थी अब रवीश ने नयी बात की कि वह वहां न जाये इस बात के लिए कोई भी तैयार न हुआ। बीमार दीदी को भी दीपक व रीया के साथ वापस उसी शहर में जाना पडा रवीश की एक न चली ...वह मन मनोस कर घर पर वही रह गया उसे दीपक के हथकंडे अच्छी तरह समझ आते थे साथ ही उसकी चालाकियां भी और वह दिखावा भी जो वह दिखाता था कि उसे परिवार की कितनी परवाह है ...उन्होने दुनियां देखी थी लेकिन परिवार के आगे बेबस हो चले अपने गुस्से का इजहार उन्होने साथ न जाकर किया।

खाली घर में नौकर व पिताजी के साथ वह अकेले थे अबकी सासु मां भी उन सबके साथ थी उनका पुराना नौकर कालू रवीश के पास आकर बोला, “ बाबुजी आपकों जीया बिटियां के साथ जाना चाहिए था ”..

“ क्यों कालू ? सासु मां और बच्चे तो साथ गये है न! ? ”

“ हाँ वह तो ठीक है पर जीया बिटियां बहुत ही बीमार रहती है। एक बार आप भी जाते तो डॉ0 से समझ लेते उ को कौन बीमारी है ? ”

तुम सही कह रहे हो कालू लेकिन मै दीपक की कही हुई जगह पर नही जाना चाहता  था। मैने जीया के लिए बहुत ही बडे डॉ0 से बात की थी लेकिन मेरी नही सुनी मेरी गैरहाजिर में इसने जरा क्या ध्यान रखा खुद को बडा हीरों बन रहा है, जबरन मेरे परिवार का सदस्य बन बैठा। ”

“ जी बाऊ जी आप सही कहे रहे ई दीपक बाबू पता नही कहाँ घुमे रहे कौन कौन अजीब अजीब आदमी के मिले रहे है ई ई  की नीयत ठीक नही। ”

“रवीश बेटा, ”  …

“ हाँ पिताजी …”  ससुर की पुकार सुन रवीश उनके पास चले गये। कालू ने अपना गमझा उठाया और घर की साफ-सफाई में जुट गया।

....

इस  बार जीया और सभी लोग घर वापस तो आ गये लेकिन

जीया की तबियत में खास फर्क नही पडा, रवीश पहले ही नाराज थे पर पत्नी की हालत देख उन्होने कुछ नही कहा एक बात उन्हे दुख पहुंचा रही थी नन्नू व रिन्कू उनकी बात कम और मौसा की बात को ज्यादा मानने लगे  थे इस वजह से दीपक उनकी माजाक उडाता .. “ बडा काबिल बनता है बच्चे तो कहना नही मानते ”.. गुस्से में रवीश ने नन्नू पर सख्ती बरतने शुरू कर दी वह धीरे-धीरे बडा हो रहा था इन सभी कारणों से उसने घर में सभी लोगो से दूरी बनानी शुरू की और अपने दोस्त निशान्त के साथ समय बिताने लगा वह उसके साथ स्कूल में था, पढाई का बहाना बना नन्नू उसी के घर में ज्यादा समय बिताता।

जीया का बेटा उससे दूर हो रहा था वह और भी दुखी रहती रवीश ने अपनी फैक्ट्री के सभी विदेशी प्रोजेक्ट रद्द कर दिये उसका ध्यान जीया की तरफ लगा रहता  , वह चाहते थे कि जीया खुश रहे।

जीया और रवीश के घर फिर से नया मेहमान आने वाला था ….ऐसे कमजोर शरीर में प्रेगनेंसी...डॉ0 ने कहा कि वह चाहे तो इस बच्चे को गिरा सकती है क्योकि उनके पहले ही दो बच्चे है लेकिन जीया न मानी उसने कहा कि वह उसे जन्म देगी ….बच्चे अपनी दूनियां में मग्न रहते! जीया के पास  काम से ही आते ..दीपक अपने रंग ढंग सबको देखा चुका था बडे दामाद को वह फूटी आँख न भाता लेकिन रीया व बच्चे की वजह से सभी उसे बरदाश्त करते। रीया ने उससे शादी कर पूरे परिवार को गहन पीडा में पहुंचा दिया था जिससे बाहर आना किसी के बसे में न रहा बस समय अपनी रफ्तार से भागा चला जा रहा था उस पर  किस का जोर चला है!

जीया ने अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया वह काफी मोटा

सुंदर था रिन्कू बहुत खुश थी ...उसे उसकी बहन मिल गयी।

नन्नू ने जब उस बच्ची को देखा तो माँ से गुस्सा हुआ कि उन्होने कभी नही बताया था पहले कि उसकी एक और बहन आने वाली है ...वह गुस्सा हो अपने दोस्त के घर चला गया। दोस्त की माँ ने उसे समझा बुझा कर घर वापस भेज दिया नन्नू ने खुशी खुशी अपनी नन्ही सी बहन को गोद में उठा लिया।

खुशी का माहौल था नानी व मौसी बात बनाने लगे जीया कि दो दो बेटी हो गयी इससे अच्छा तो एक लडका और हो जाता, रवीश उनसे नाराज हो गया और उसने अपनी बेटी को उन्हे छुने नही दिया वह जानते थे कि दीपक के रंग में सास और साली रंगे हुए है अब वह उनसे बात नही करते थे।

रवीश रात भर जग कर अपने छोटे से बच्चे की देखभाल करते ताकि पत्नी को तकलीफ न हो।

जैसे जैसे वक्त बीत रहा था घर हालात सुधरने के बजाय बिगडते ही गये नन्नू व रिन्कू अपनी बहन के साथ खेलते नये बच्चे के आने से पिता का ध्यान भी उसमें रहता इससे दीपक को काफी जलन होती उसका बच्चा पतला दुबला ही रहा जबकि जीया का बच्चा सुंदर व तंदुरूस्त रीया उसे देख जलने लगी उसे लगता दीदी ने दो बच्चों के बाद भी हमें जलाने के लिए डॉ0 के मना करने पर भी अपना एक और  बच्चा पैदा किया …! रीया व दीपक की जलन चरम सीमा पर जा पंहुची।

आये दिन दीपक रवीश से उलझने की कोशिश करता ...ससुर का पैसा बिजनेस करने के नाम पर डूबा दिया, बडे दामाद रवीश से जलता व उसके बारे में झूठी बातें फैलाता घर का माहौल उसने बर्बाद कर दिया था ...यह सब देख पिता का ब्लडप्रेशर बढने लगा।

##

जारी है।

पश्चाताप की ज्वाला -4

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पश्चाताप की ज्वाला-1

सुनीता शर्मा खत्री©



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