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@dawriter

पश्चाताप की ज्वाला- (अन्तिम भाग )

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sunita by  
sunita

पश्चाताप की ज्वाला (अन्तिम भाग)

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जीया को अस्पताल में कब तक रहना होगा डॉ0” ,

“अभी इनकी कन्डीशन ठीक नही है  बाद में बता देगे ,” रवीश ने डॉ0 से पूछा था। ऑफिस से बहुत छुट्टी ले ली अब वह और नही देगें क्या करू थोडी देर के लिए जाना ही होगा नन्नू को छोड जाता हूं यहाँ ! रवीश ने नन्नू को सख्त हिदायत दी माँ का पूरा ख्याल रखना , “ ठीक है पापा ” नन्नू ने हामी भर दी। चलो अच्छा है स्कूल नही जाना पडेगा यही अस्पताल में  रहुंगा नन्नू के किशोर मन ने उससे कहा। माँ बिस्तर पर लेटी रहती नर्स ही दवाई व खाने पीने का ध्यान रखती। नन्नू अस्पताल के कमरे में में सोफे पर लेटा था नर्स जीया को दवाई दे रही थी , तभी एक लडकी उस कमरे में दाखिल होती है वह नर्स से आकर कुछ धीरे से कहती है उसने कहा कि, “ वह अभी देखती है तब तक तुम यहाँ रूको ! ”

वह लडकी वहाँ रूक जाती है नन्नू की ओर देखती है वह शरमा जाता है पहली बार किसी लडकी की ओर उसने भी देखा देखने में  साधारण थी लेकिन चढती उम्र उसे सुंदर बना रही थी ... नन्नू उसे एक टक देखता रहा, कौन है यह शायद उस नर्स की बेटी थी क्योकि उसने पहली मर्तबा उसे देखा था तभी उसकी माँ वापस आ गयी तुम जाओ मै शाम को घर जल्दी आ जाऊगी सुनो यह  कुछ पैसे रख लो। वह चली गयी नन्नू उसे जाते हुए देखता रहा , वह बोर हो रहा था तो मैगजीन पढने लगा उसमे छपी लड़कियों की तस्वीरों में उस लड़की का चेहरा नजर आने लगा ...उसका दिल जोर से धडकने लगा यह क्या हो रहा है मुझे नन्नू को चेहरा शर्म से लाल होने लगा।

घर पर रिन्कू निक्कू को संभाल नही पा रही थी वह उसे उठा कर नानी व मौसी के पास ले आयी। “ मौसी निक्कू को नहला

दो बहुत गन्दी हो गयी है है दो दिन से नहायी भी नही , ”

“ ठीक है अभी नहलाती हूं  ” कह मौसी निक्कू को रगड रगड कर नहलाने लगी छोटी बच्ची की मुलायम त्वचा तोरी के छिलके की रगड से जगह से छिल गयी रीया अपने होश में नही रहती थी उसकी दीदी अस्पताल  भर्ती थी लेकिन जब से उसके जीजा जी ने दीपक को मारा वह दीपक से कह भी न पायी कि उसे अपनी बडी बहन से मिलना था वह अन्दर से बहुत दुखी रहती आर्थिक अभाव व उलझते रिश्तों ने उसे भी गमगीन बना दिया उसका पति एक दम नकारा निकलेगा उसे इसका इल्म न था।

रवीश घर पर पहुंचे तो निक्कू को गोद में उठाया निक्कू की रगडी हुई त्वचा देख वह परेशान हो गये रिन्कू को खुब फटकार लगाई उन्होने वह उसे खुद ही नहला देगे कोई जरूरत नही मौसी को कहने की। घर और ऑफिस के काम निपटा कर जब रवीश वापस पत्नी के पास अस्पताल पंहुचे तो जीया  और नन्नू सो रहे थे तुमने नन्नू को खाना लाकर दिया। उनको परेशान देख जीया की देखभाल कर रही नर्स ने बोला कि वह चाहे तो उनकी बेटी उनके घर के काम और छोटी बच्ची को संभालने का काम कर लेगी जो ठीक समझना दे देना।

इन परेशानियों को देखते हुए रवीश ने उस नर्स की बात मान ली और नन्नू को बोला उनकी बेटी को कल उसके घर से ले आना

नन्नू खुश हो गया।

जब से अस्पताल की नर्स की बेटी को नन्नू घर लेकर आया कोशिश करता घर रहने की अपने पापा को मना कर देता बहाने बना कर निक्कू अकेले रहती है और रिन्कू उसे नही संभाल पाती रवीश भी कुछ न बोलते पत्नी की चिन्ता में यह ध्यान न रहा उनका किशोर बेटा चंचल हो चला था वह निक्कू काू बडा भाई कम पापा ज्यादा बनने लगा। जब से रीतिका उसके घर में थी वह कुछ ज्यादा ही जिम्मेदार बन गया। नानी , मौसा व मौसी यह देख मन ही मन मुस्कुराते।

रीतिका घर के सारे काम करने लगी। जब उसका मन करता नन्नू उसे उसके घर लाता ले जाता।

एक दिन जीया की तबियत कुछ संभली तो रवीश ने कहा वह थोडी देर के लिए ऑफिस हो आते है, जीया

जीया की आँख भर आयी , “ तुम्हे मुझसे ज्यादी नौकरी की पडी है। ”

रवीश ने  जीया की हालत देख कहा तुम नही चाहती तो नही जाऊंगा नौकरी करने , यही रहुंगा तुम्हारे पास थका हारा रवीश जीया के बेड पर ही सर रख सो गया। जीया ने भी अपनी आँखे बन्द कर ली तभी नन्नू खाना ले आया। खाना दे कर तुंरत वापस जाने लगा तो रवीश ने पछा ,  कहाँ की जल्दी है ? “ पापा मुझे रितिका को उसके घर से लेकर आना है , वहाँ निक्कू अकेले है। ”

‘ठीक है तुम जाओं। ’

उन्हे जो दिख रहा था नन्नू की आँखों में उससे वह चिन्तित हो गये। रवीश  जीया को बोलते है , “ जीया तुम जल्दी ठीक हो जाओ बच्चे अकेले है वहां कोई उनका ध्यान नही रखेगा। ” जीया चुपचाप निढाल थी उसकी सांसे तो चल रही थी लेकिन यूँ लगता था मानो जिस्म में जान ही न हो। रवीश जीया का हाल देख मन ही मन रो रहे थे वह अपनी पीडा को दबाते रहे।

तभी कमरे में डॉक्टर विजिट के लिए आये रवीश को कुछ उसके बाद रवीश  घर पंहुचे , “ मम्मा के पास कौन कौन जायेगा .. रिन्कू रिन्कू ...वह दौडती हुई आयी क्या हुआ पापा मम्मा कैैसी है  ! तुम चलोगे मम्मी के पास चलो तैयार हो जाओं। ”

आप अस्पताल चलोगे क्या हुआ रवीश जीया ठीक तो है न हाँ वह ठीक है ,  चलों फिर , अरे कालू मेरी छडी तो ले आ मै जीया बिटियाँ के पास जा रहा हूं ! ”

“ अरे तुम कहां जा रहे हो ! ” तभी रवीश की सास वहाँ आ धमकी, “  रीया की ससुराल से कुछ मेहमान आ रहे है दीपु से मिलने ”   “ तुझे उस कमीने के मेहमानों की पडी है अपनी लडकी की कोई चिन्ता नही जो इतने दिनों से अस्पताल में भर्ती है। ”  “ मरने दो उसे हर वक्त बीमार बीमार पिंड छुटे ” बडबडाती हुई वह चली गयी उसने एक बार भी यह न सोचा रवीश व बच्चों के दिल पर क्या बीत रही होगी रिन्कू ने जब  यह सुना तो नानी के सर पर गिलास फेंक कर मार दिया ! “ बुढ्डी नानी तू मर जा मेरी मम्मा नही मरेगी ”, वह जोर जोर से चिल्लाने लगी, “ अरे मार दिया रे कैसी लडकी जनी जीया तूने दोनो माँ बेटी एक जैसी है  !” रवीश को हँसी आ गयी लेकिन उन्होने रिन्कू को डाँटा बडों के साथ ऐसे नही करते। रिन्कू ने गुस्से से मुंह फूला लिया और छोटी बहन को अपनी गोद में उठा कर बोली चलो, “ पापा मम्मा वहाँ अकेले है। ”

रास्ते में रवीश ने श्वसुर को बताया उन्होने नौकरी छोड दी है क्योकि जीया नही चाहती अब वह उसकी और बच्चों की देखभाल खुद ही करेगे। कोई बात नही रवीश बेटा एक बार जीया ठीक हो जाये फिर जो कहोगे वही कर देगे रूपये पैसे की चिन्ता न करे बस बच्चों व जीया का ध्यान रखे।


मम्मा रिन्कू अस्पताल में जा कर मां के कानों में बोली, देखों कौन आया है  ! यह देखों निक्कू और उसे माँ के पास ही बैठा दिया इतने दिनों के बाद माँ को देख निक्कू उससे लिपट गयी और अपनी तोतली आवाज में मम्म म मम्म करने लगी उसकी आवाज सुन जीया उठ गयी निक्कू मेरा बेबी , आ जा मेरे पास और उसे खुद से चिपका लिया यह देख पिता और पति की आँखे छलछला उठी।

जीया घर चलोगी?  रवीश ने जीया से पूछा असपताल में बहुत दिन हो गये थे डॉक्टर्स ने भी डिस्चार्ज करने को बोल दिया। जीया ने कोई जवाब न दिया निक्कू को अपनी आगोश में लिए रही।  सभी जीया को वापस घर ले आये जैसे ही जीया अपने कमरे में पंहुची उसने आँखे पलटनी शुरू कर दी उसकी सांसे तेज तेज चलने लगी ,  जीया मै तुम्हे यहाँ से कल ही ले जाऊंगा , हाँ मम्मा पापा ने नया घर भी ले लिया है रिन्कू बोली नाना ने भी कह दिया जहाँ जीया कहेगी वहाँ ही रहेगे वो भी हमारे साथ जायेगे।

जीया रवीश की आँखों में आँसु आ गये तब तक नन्नू भी वहाँ आ गया, पापा मम्मी को तुरंत ले चलों अस्पताल जल्दी करो! आनन फानन में नन्नू ने गाडी निकाली। सभी वापस अस्पताल चल पडे दीपक और रीया ने कहा ,  वह भी आयेगे लेकिन रवीश ने इन्कार कर दिया।

अस्पताल पंहुचे तो डॉक्टर चौक गये ,  क्या हुआ इन्हे ठीक तो थी यह किसी ने कुछ कहा तो नही , नही डॉक्टर किसी से कोई बात हुई ही नही घर जाते ही जीया की हालत खराब होनी शुरूहो गयी थी हम तुंरत ले गये , वहाँ गेट पर मौसा खडा था ,मम्मा को घूर रहा था।

जीया की पल्स बहुत धीमी चल रही थी कुछ ही देर में उसके शरीर ने हरकते करनी बन्द कर दी ,  शी इज डेड ..वी कान्ट डू नथिंग !!
" नही …..जीया…. मुझे छोड कर मत जाओं तुम नही जा सकती! " रवीश पागलों की तरह चिल्लाने लगा पापा नन्नू रिन्कू भी रोने लगा सबकों रोत देख छोटी बच्ची भी रोने लगी। नन्नू ने रिन्कू से उसे ले लिया , मत मेरी बहन मै हूं न आज मै ही तेरी मम्मा हूं। हमारी माँ मर गयी सबने ताने दे दे मार डाला वह जोर जोर से रोने लगा , मार डाला मेरी माँ को !
होनी बेरहम थी मासूस बच्चों को रोता बिलखता छोड जीया दूसरी दूनियां में जा चुकी वह हार गयी थी अपनों की नफरत से घुरती आँखों से। रवीश रो रहा था , काश तुमने थोडा सा वक्त दिया होता जीया मै तुम्हे वहाँ से दूर ले जा रहा था तुम खुद ही इतनी दूर चली गयी। वातावरण बहुत गमगीन हो चला चला डॉक्टर व नर्सों ने हौसला दिया कि वह खुद को संभाले बच्चों की खातिर।

शमशान में चिता पर जीया का का मृत शरीर जल रहा था और रवीश पश्चाताप की ज्वाला में।

समाप्त

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सुनीता शर्मा खत्री ©

यह कहानी पूर्णतया कल्पनाओं पर आधारित है किसी  भी पात्र, घटना  व परिस्थितयों , काल की समानता के प्रति  उत्तरदायी नही है।

यह कहानी कैसी लगी आपकी प्रतिक्रयाओं का इन्तजार रहेगा फिर मिलेगे एक नयी कहानी के साथ धन्यवाद।

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