45
Share




@dawriter

इज्जत के साथ

0 286       

अरे लक्ष्मी की माँ,ओ लक्ष्मी की माँ कहाँ हो? 

बेसन पर रंगे-पुते हाथों को साथ लिए लगभग भागती हुई.सिर पर पल्ला उन्ही छपे हाथों से सांभालती हुई, चेहरे की चमक कह रही थी पैंतीस की होगी ,पर छवि की अस्त व्यस्तता पचास पार कर गयी थी.

जी.जी.जी वो कढी बना रही थी इसलिए थोडा देरी...

अरे कोई बात नही, आज हम बहुत खुश है एक खुशखबरी है हम सब की खातिर,

खुशखबरी का पहले बताओ मिठा का खिलाओगी?

जो बोलोगे वो बना देंगे चीनी नही है घर में,पर खुशखबरी का है?

हमारी लक्ष्मी के लिए रिश्ता है आया है.

हो हाथ का बेसन मुँह पर था लक्ष्मी के लिए..पर वो ...तो बस नौ की है.

क्या बोली, जा पानी लेकर आ मनहूस हर अच्छी बात में रोडा़ बन जाती है

अम्मा अम्मा एक नौ साल की लड़की हवा की तरह चलती हुई और उतना ही चिल्लाते हुए, डर गयी अचानक अपने ही पिता को देखकर बाबा कहाँ से आ रही हो और इतनी तेज आवाज... वो स्कूल सिर झुकाकर और उस से भी ज्यादा झुकी हुई आवाज.

क्या करेगी स्कूल जाके रोटी बनाना का स्कूल में सिखाते है? कल से कोई स्कूल नही...

पर वो बाबा, आवाज से भी ज्यादा कड़क नजर ने देखा और लड़की की जबान हलक में ही अटक गयी,

जा अंदर

न लक्ष्मी के बापू,जो मेरे साथ मेरे बापू ने किया वो मै अपनी बेटी के साथ न होने दूंगी. उसकी शादी न होगी इत्ती छोटी में, वो स्कूल जायेगी. अच्छा आज गूंगो को भी बोलना आ गया, अपने मरद से मुहँ चलाती है, तुझे बताता हूँ,

क्या बताऐगा बड़ा मर्द बनता है ? ये घर मेरी कमाई से चलता है सुबह पाँच बजे से रात तक काम करती हूँ जूठन साफ करती हूँ कपड़े सिलती हूँ क्या करता है तू दारू पीकर पड़ा रहता है.

इतनी हिम्मत

काहे नही होगी हिम्मत,आज तक सह लिया बात मेरी थी,पर अपनी बेटी के लिए न...न बिल्कुल न. रोटी बनाने के साथ साथ रोटी लाने के लायक भी उसको बनाऊँगी वो भी इज्जत के साथ।



Vote Add to library

COMMENT