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@dawriter

ख़ुद्दारी

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उसकी खुद्दारी को सलाम करने का जी चाहता था। कई बार गुस्सा भी आता। किस मिट्टी की बनी है वो। बच्ची ही तो है अभी। उमर सिर्फ 9 साल। जब बच्चे चॉकलेट,आईसक्रीम के लिये ललचाते हैं वो…इतनी अजीब क्यूँ है।

उसके लिये चॉकलेट लाई थी। पहले तो ले गई। फिर जाने क्या हुआ, आधे घंटे बाद आकर ये कहकर लौटा गई कि मैं चॉकलेट नहीं खाती। आप ही खा लीजियेगा।
गुस्सा बहुत आया उस पर।वो डेयरी मिल्क अब तक मेंरा मुंह चिढाती है। एक बार और उसके लिये मिठाई लाई। रहम खाकर नहीं। बस ये सोचकर,उसे अच्छी लगेगी।
उसने लेने को हाथ बढाये, फिर मालकिन के दरवाजे की ओर देखा और अचकचा कर हाथ पीछे खींच लिये। हमें मिठाई पसंद नहीं।

बस,तभी से मेंने उसके लिये लाना बंद कर दिया। उसके मालिक और मेंरी दीवार एक है। हर बात छन छनकर आर पार हो ही जाती है।
कल…टीवी देखते हुए अचानक से जोर जोर से आती आवाजों ने टीवी का वॉल्युम कम करने को मजबूर कर दिया। वो रो रही थी। मेंरे अंदर भी कुछ भीगने लगा।
तभी आवाज आई-हम नहीं आना चाहते थे यहाँ। माँ ने जबरदस्ती भेजा ना होता, कभी नहीं आते।
फिर गुस्से में उबलती आवाज आई-तो क्या चोरी करके खाएगी। चोर कहीं की।
हमने चोरी नहीं की।
तो किचन से खाना कहाँ गया।
मेंरे अंदर एक शीशा सा तड़का। लड़की पर खाने की चोरी का इल्जाम। क्या सच में उसने खाना चुराया होगा।
वो रोती रही और मैं …उसके आंसुओं के दरिया में बहती रही।
ओह ! भगवान किसी को इतना मजबूर भी मत बना। किसी को गरीब मत बना।



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