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@dawriter

श्रेणी- Story/Domestic Violence

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sonikedia12 by  
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घरेलू हिंसा
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हाँ ये शब्द कई बार सुना । कई चोट और निशान भी देखे। पर उन चोटों और निशानों का क्या जो बड़े प्यार से दिए जाते हैं पर हम कई बार पहचान नहीं पाते और अंदर ही अंदर घुटते है एक जिंदा लाश की तरह जिसमें सिर्फ़ साँसे  होती है पर खुद के लिए नहीं । इसमें गलती किसकी ये तय करना भी कठिन होता है । खुद ही एक जाल बनाते है और उसमें  फँस जाते हैं ।रजनी अपने अंदर ही अंदर खुद से बातें किये जा रही थी। जब से उसने ममता के पति को  किसी दुसरी औरत  के साथ देखा।


एक दिन अरे ! ये क्या .. रजनी ने देखा कि ये तो उनके पड़ोस में  रहने वाले वर्माजी है। हाँ ममता और उसके पति कितने खुश है दोनों एक दूसरे के  साथ.. दोनों ने कितनी मुश्किल से अपने- अपने घरवालो को मनाया था तब जाकर कहीं उनकी शादी हुई थी। शादी के तेरह साल हो गए थे।अरे  हाँ ये तो पिछली बार भी किसी और की पत्नी के साथ घूम रहे थे।कोई भी  देखेगा तो ये  समझेगा कि ये इनकी बीवी है। पर ये तो अपनी बीवी से बहुत प्यार करते हैं । दोनों साथ में खुश भी है । फिर सोचा ..हो सकता है कि किसी कारणवश कोई बाॅस की पत्नी को लेकर आया हो । रजनी ने सोचा पता नहीं ..मैं ही कुछ ज्यादा सोच लेती हूँ।


उस दिन उसने घ्यान नहीं दिया । पर आज फिर से ये राजेश वर्माजी किसी औरत के  साथ होटल में बैठा हैं ।अभी कल ही तो ममता और राजेश वर्मा जी रात को होटल आए थे। रजनी ने वहाँ से सब्जी लिया और घर की ओर चल दी काफी दिनों से उसका बेटा होटल की सब्जी के लिए बोल रहा था।

घर का सारा काम खत्म कर वो ममता के घर पहुँची। उस बात के लिए जो उसे परेशान कर रही थी। वो उसके घर पहुँची। ममता ने बेहद खुश होकर रजनी को बैठाया। रजनी की हिम्मत ना हुई कुछ पूछने कि फिर भी उसकी आँखो में बार- बार उसके पति का चेहरा घुम रहा था । काफी देर तक बोलने की कोशिश की...फिर वो उठकर जाने लगी तो बोली तुम्हारे पति कहाँ है.

आज ..तो ममता ने कहा कि आँफिस मे होंगे तो रजनी ने कहा कि वो अभी अभी होटल से आयी हैं । उसके पति को भी देखा किसी के साथ ..

कुछ देर के मौन के बाद ममता ने कहा हाँ उसका पति उसे बताकर गया है । रजनी ने कहा और तुमने हाँ कर दी । ममता ने कहा कि क्या करू...बोलो  उसका पति उसे प्यार करता हैं । पर साथ में  ना ही मारता हैं ना अशब्द कहता है विरोध करने जवाब  मौन होता है। कहता  हैं अगर तुम कर सकती हो तो तुम भी कर लो । मुझे कहता हैं कि मैं बहुत पूराने विचारो की हुॅ और मेरी सोच बहुत छोटी है। ममता एक बेहद सुलझी और चरित्रवान औरत है। ममता के पति की ये बात ममता को कितनी तकलीफ दे रहा होगा ये रजनी को अच्छी तरह से पता है।ममता ने कहा कि अगर अपने  पति को छोड़ दूँ तो कहाँ जाऊँ । बाहर अकेली औरत को कोई छोड़ेगा नहीं । फिर मेरी बेटी इसका भी भविष्य खराब हो जाएगा । रजनी ने कहा कि उसका पति उस औरत से कोई प्यार भी नहीं करता और ममता फूट-फूट कर रोने लगी।

उसी समय उसकी कामवाली रज्जो आ गई । उसके  हाथ में कुछ चोट के निशान थे रजनी ने पूछा कि ये चोट कैसे आई तो रज्जो ने कहा रहने दो मेमसाब आप क्या कर लोगे जानकर । फिर भी रजनी के बार-बार आग्रह करने पर उसने कहा कि ये तो उसकी रोज की कहानी है।उसका मरद (पति)जितना कमाता हैं  दारू में खरच(खर्च )देता हैं ।और उसके विरोध करने पर उसे कहता हैं कि वो तो काम करने नहीं मालिकों के साथ रंगरलिया मनाने जाती हैं ।अब आप ही बोलो अगर काम ना करू तो मेरे बच्चे भी अनपढ़ और गवार रह जाएंगे और अपने बाप की तरह ही शराबी बन जाएंगे। फिर वो अपने काम में लग गयी।

रजनी ममता की तरफ देख रही थी। ममता शायद कुछ सोच रही थी । रज्जो की बात सुनकर रजनी की समझ में नहीं आया कि क्या कहे कि अनपढ़ कौन हैं । रज्जो के कारण उनकी बातें बीच में ही खत्म हो गयी।
रजनी ने ममता  से कहा कि सब ठीक हो जाएगा और अपने घर आ गयी। रजनी सोच रही थी कि ममता का पति कैसा है सबकुछ होते हुए भी अपनी पत्नी को अपनी मस्ती के लिए दुख दे रहा है । रजनी के  मन ही मन सोच रही थी ममता के बारे में ..

ना कत्ल हुआ ना वार हुआ
ना खून बहा करते हैं
ना जख्म दिखा करते है
पर हर बार दर्द हुआ करते है
कुछ घाव बस ऐसे ही होते हैं ।

शब्दों की तलवार से जो
प्रहार होते हैं
बड़े खतरनाक होते हैं
वो दर्द दिखते नहीं जो
अंदर ही अंदर उबलते है
कुछ घाव बस ऐसे ही होते है ।

मौत तो खामोखाॅ बदनाम है
मैंने कुछ जिन्दी लाशे देखी हैं
जिनकी बस साॅसे होती हैं
ना खरोच ना निशान होते हैं
कुछ घाव बस ऐसे ही होते है ।

लहूलुहान करते  हर वक्त
जिनका ना जमीन होता हैं
ना आसमान होता हैं
कुछ जमींदार ऐसे होते है
कुछ घाव बस ऐसे ही होते है ।

क्या हैं घरेलू हिंसा वो चोट जो दिखते है या वो जो नहीं दिखते नासूर की तरह होते हैं । रजनी के मन में एक तरफ ममता तो एक तरफ रज्जो थी ममता जो अपने पति के अनैतिक सम्बंधो का बोझ ढोते हुए जीवनयापन कर रही थी या रज्जो जो अपने पति के झूठे लाक्षन के साथ सिर्फ अपने बच्चों की परवरिश के लिए दिन रात काम करती हैं ।

बहुत दिनों से रजनी ममता से मिली नहीं थी तो ममता रजनी के घर आयी । ममता काफी उदास लग रही थी। पहले तो उसने कहा कि कुछ नहीं फिर कहा कि कल उसके पापा के दोस्त का बेटा जो बचपन उसके साथ पढता था उससे मिलने आया था ।उसे देखकर बचपन की सारी बात याद आ गयी थी हमलोग बहुत सारी बातों को याद कर हँसते रहे ।रजनी ने कहा ये  तो बहुत अच्छी बात है बचपन के दोस्त ऐसे ही होते है उनसे मिलकर बचपन वापस लौट आता हैं । रजनी ने सहमति जताई और कहा कि पर ये सब उसके पति को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा जो आज तक आधुनिक होने की दुहाई देता था।ममता ने कहा कि उसके पति ने तो यहाँ तक कह दिया कि वो उससे प्यार ही नहीं करती और उसके भटकने का कारण भी वो ही है।रजनी के पास शायद शब्दों की कमी हो गयी उस वक्त वो सोच ही नहीं पा रही  थी कि क्या ये  निशान  ममता कभी किसी को दिखा पाएगी जो जीवन भर ना मिटेगा।

              Soni kedia

#stopdomesticviolence



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