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@dawriter

नाम

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जया अपने अतीत की यादों में खोयी थी।उसे ठीक से याद नहीं पर जब से होश संभाला सभी यही कहते थे कि वो अपने माँ को खा गयी। जब वो छोटी थी तो सोचती थी कि उसने कैसे खाया अपने मुँह को बड़ा कर देखती थी कि क्या माँ को सचमुच उसने निगल लिया  साॅप की तरह..जैसे जैसे बड़ी हुई उसे समझ मे आने लगा था ।

ये उसके लिए कोई नई बात नहीं थी । उसने सोचा कि पता नहीं वो कितने लोगों को खा गयी । अचानक उसे याद आया उसका एक नाम और भी है जो उसे उनलोगो ने दिया है जो उसका आज तक शोषण करते रहे है ।

कलमुँही हाँ ये जया का एक और नाम है ।कभी कभी जया घंटो अपना चेहरा आइने में देखती कि उसका मुँह कहाँ से काला है ।जैसे जैसे जया बड़ी होती गई उसे उस बात के लिए ताना मारते जिसमें उसका कोई कसूर नहीं था । कोई बच्चा ये कभी ना चाहेगा कि उसकी माँ मर जाए ।

तभी अचानक आवाज़ आती हैं कलमुँही कहाँ मर गयी.. ये उसकी भाभी की आवाज़ थी जो सिर्फ रिश्ते में उसकी भाभी थीं कहने को तो वो उस घर की बेटी थी पर उसका दरजा एक नौकरानी का था । लोग यही कहते थे कि कितने अच्छे है ये लोग ..वरना आजकल जवान लड़कियों को कौन सहारा देता हैं । जया का कोई सगा भाई तो था नहीं रमेश को ही उसके पिता ने बेटा माना था। पर जब से उसके पिता गुजरे है वो मालिक बन गया है और उसकी भाभी ने तो उसे नौकरानी बना डाला ।
वैसे भी मुफ्त की नौकरानी कहाँ मिलती हैं ।भाभी का भाई जो आवारा किस्म का है आये दिन घर पर आने लगा जया चाहे कितनी भी बचने कोशिश करती वो उसे किसी ना किसी बहाने से छूने की कोशिश करता उपर से सुनने वाला कोई नहीं ।

भाभी हमेशा कहती सुमित इस जया की बच्ची से तो बचकर रहना कलमुँही है अपने माँ को तो बचपन में ही खा गयी थी । जया सोचती थी कि काश उसमें कोई ऐसी शक्ति होती तो वो उनलोगो की जरूर खाती जो रोज उसका शोषण कर रहै हैं ।

एक दिन घर पर कोई नहीं था जया घर के कामों में उलझी थी तभी सुमित वहाँ आ पहुँचता हैं और घर के दरवाजे को बंद कर देता हैं । जया कुछ समझती उससे पहले ही वो लपककर उसका हाथ पकड़ लेता है जया के अंदर काफी दिनों का आक्रोश भरा था जो अब बदला लेने को आतुर था उसने लपककर पास पड़ी लकड़ी को उठाया और सुमित के सिर पर दे मारा ।सुमित ने सपने मे भी ना सोचा था इतनी कमजोर दिखने वाली लड़की इस तरह से उसके सिर पर वार करेगी । वो पलट के दरवाजे की ओर भागा और दरवाजे खोल दिया ताकि अपने आप को बचा सके ।जया उसके पीछे भाग कर उसे पकड़ लिया सुमित ने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि उसे छोड़ दे ।बाहर लोग इक्कठा हो गए  थे और समझने की कोशिश कर रहे थे कि बात क्या है । तभी उसकी भाभी आ गयी और बिना कुछ पूछे ही चिल्लाने लगी कलमुँही अब क्या मेरे भाई को  खाएगी । जया ने कहा कि हाँ तुम्हे और तुम्हारे भाई को दोनों को ही कच्चा खा जाऊंगी । सभी मुँह खोले जया को देख रहे थे अब सब की समझ में आ गया था कि माजरा क्या हैं । सुमित  और उसकी बहन दोनों उससे माफी माँग रहे थे ।



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