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@dawriter

घरेलूं हिंसा

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संपूर्ण भारत में लगभग 70% महिलाएँ इस प्रकार की हिसा का शिकार है। पुरे भारत में लड़कियों की एक जाती पैदा होने को तरसती है और अगर पैदा हो गयी तो हसने खेलने और पढ़ने को तरसती है , कोई अदद जीन्स और कॉस्ट्यूम सूट पहनने को तरसती है,किन्तु वो जी रही है । स्त्रियां संसार की सबसे अमूल्य धरोहर है, उनकी सुंदरता उनकी सकल से नही बल्कि उनके आंतरिक गुणों से होती है। लड़किया अकेले ही संसार की बदसूरत चीजो को सुंदर बना देती है । उनका एक एक पल संसार को न केवल सुन्दर बना रहा है अपितु सांससंसार को नवीनता प्रदान कर है वो एक माता के रूप में, बहन के रूप में, पत्नी के रूप में, लड़की के रूप में संसार को सुन्दर एवं आकर्षक बना रही है। किन्तु जब यही किसी हिसा का शिकार होती हैं तो कितना कष्ट दायीं होता है किसी लेखक ने सही कहा था कि ""अगर हाथो में रेत हो तो आँखों में पानी स्वयं ही आ जाता है । ठीक उसे प्रकार महिलाओं के प्रति होने vali घरेलूं हिसा है जो किसी भी सुंदर चीज को बदसूरत बना देती है । एक बच्चे को बच्चे से इंसान बनने में जिस ईट गारे की आवश्यकता होती है वह उसे महिला से ही प्राप्त होती है।। डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि महिलाओं की शक्ति मौका पाने पर प्रकट होती है और फिर बढ़ती ही चली जाती है किंतु दबाने पर दबती इतनी है कि जैसे मनो कभी रही न हो ।। वर्तमान समय में लड़कियां न केवल संघर्ष कर रही है बल्कि वो जीत भी रही है चाहे वो पढ़ाई का क्षेत्र हो, खेल का क्षेत्र हो, या घर हो ।।



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