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@dawriter

आखिर क्यों ...??

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क्या हुआ मौसी ...?? कुछ नहीं ....कुछ नहीं!! कहते कहते ..... फिर से राधा मौसी फफक पड़ी। अरे मौसी! क्या हुआ ...??? बताइए तो सही, रुकिए! एक मिनट मैं पानी लाती हूँ, भाग कर रिंकी पानी लेकर आई और दरवाजा बंद करके राधा मौसी के पैरों की तरफ बैठ गयी। आप पहले पानी पीजिये, ठीक हूँ ....मैं, ठीक हूँ .... कुछ नहीं हुआ, कहते कहते फिर से राधा मौसी की आंखे सारी कहानी कह गयी। आप मुझे बताइए न, मौसी! क्या हुआ ....?? आपको ऐसे रोता हुआ नहीं देख सकती मैं .... प्लीज़!! बताइए न, मैं माँ को बुलाती हूँ, माँ!! माँ!! रहने दे, रिंकी! उस बेचारी को क्यों परेशान कर रही है ...??? वैसे ही उसकी जान को कम काम थोड़ा है, तो फिर बताइए न मौसी क्या बात है ? बताया न .... कुछ नहीं ..... कुछ कैसे नहीं ....?? बिना बात कोई रोता है क्या ?? और मेरी शादी तो नहीं है न, चलो..... मैं मान भी लेती की आप इसलिए रो रही है, राजीव भाई की शादी है!! अब आप बताती है, या मैं माँ को बुलाऊँ ?? अरे! नहीं .... नहीं .... बैठ, बताती हूँ .... रात को शादी है न इसीलिए रह रह कर चिंता हो रही है, किस बात की चिंता ...?? मौसी! आश्चर्य से रिंकी ने मौसी को देखा।

तेरे मौसा जी की और किसकी, मौसा जी की ....!! क्यों वो ठीक तो है न ...?? अभी तक आये भी नहीं! नहीं वो सही है और आते ही होंगे, अभी रास्ते मे है। मैंने बात की थी, कह रहे थे बहुत सारा इंतज़ाम कर लिया है, रात के लिए! ऐश करेंगे ..... आज रात! कैसा इंतज़ाम ?? मौसी! वही पीने पिलाने का.... और क्या ...?? जब मैंने कहा कि आप थोड़ा ध्यान रखिएगा तो मुझ पर ही भड़क गए कि मैं चुप रहूँ, मैं अच्छे से जानता हूं मुझे क्या करना है। कोई बात नहीं, मौसी! भाई की शादी है न, घर मे! इसीलिए सभी लोग बहुत खुश है, इसीलिए मौसा जी भी अपने तरीके से एन्जॉय करना चाहते होंगे न! एन्जॉय या ड्रामा ..??? ये पहली बार नहीं है, रिंकी! हमारी शादी को 18 साल हो चुके है, तब से आज तक किसी भी शादी में जाने का मन नहीं करता। हर समय बस यही डर रहता है, कि कहीं ज्यादा न पी ले, और संभालना मुश्किल हो जाये! शुरू शुरू में ससुराल में कोई शादी होती तो मैं कभी चिंता नहीं करती थी।

लेकिन एक बार मांजी और दीदी दोनो ही ने मुझे सुनाने में कोई कसर नहीं रखी थी .... बहू क्या किया इतने सालों में तूने ...?? अपने पति की पीने की आदत भी नहीं छुड़ाई गयी तुमसे .... औरत चाहे .... तो क्या नहीं कर सकती ?? कर सकती है, पर अगर आदमी ही सुनने को तैयार न हो तो क्या कर सकती है ...?? अब कोई उनसे पूछे, क्या उन्होंने अपने बेटे को सुधारने के लिए उसकी मुझसे शादी की थी ....?? जब उसे बिगड़ते हुए देख चुप रहे, तो मुझसे ही क्यों ऐसी उम्मीद की जाए ??? कि मैं उनकी सारी बुरी आदतें आते ही छुड़ा दूंगी... कभी कभी मज़ाक में भी ये बात आती थी कि बेटा तो हाथ से निकलता जा रहा था सोचा....अब तो शादी कर ही देनी चाहिए, अपने आप सम्भल जाएगा, बिना इस बारे में सोचे कि पहले उसे सुधार ही दें, फिर ही शादी करें ....! पर.... ना, अब तो ये मेरी ज़िम्मेदारी है .... न! सम्भलने का तो पता नहीं! हां!! ऐसे एक लड़की की ज़िन्दगी जरूर बर्बाद कर दी, उन्हें बहू में तो एक कमी भी अखरती है, की जब शादी हो गयी तो मैं सर्वगुणसम्पन्न क्यों नहीं ..??? और उम्मीद ये, कि उसकी सारी कमियां मैं आते ही सुधार दूँ! क्या इसीलिए इन्हें हाथ से निकलने दिया ...?? कि आकर मैं सब बदल दूंगी पर कैसे ?? ये कोई नहीं बताता! कभी भी अगर मैं इन्हें नशे में धुत्त देखती हूँ, तो ऐसा लगता है, मानो मैंने ही कोई अपराध कर दिया हो! लेकिन जिसने किया है, उसे तो कोई परवाह नहीं!! उस दिन मैं कितना रोई ...!! सोच लिया था, कि इनके साथ कभी किसी शादी या किसी फंक्शन में नहीं जाऊंगी। पर कहाँ कर पाई मै ऐसा ..??

इसीलिए सोचती हूँ ये शादियां या फंक्शन क्यों होते हैं...??? क्यों औरतों को ही ये सब भुगतना पड़ता है ...?? हमें हर वक़्त यही डर रहता है .... पता नहीं, कहाँ, कब, कौन ??? उन्हें कितनी पिला दे ...?? और फिर नशे में अनाप शनाप बोलने लग जाएंगे! किसके सामने कहाँ क्या कह देंगे कैसे सब सहन कर पाऊंगी।

यही डर मुझे रह रह कर लग रहा है कि रात को मैं कैसे सब हैंडल करूंगी, मायके में ये मेरी शादी के बाद पहली शादी है, भगवान करे ....सब ठीक से हो जाये!! हो जाएगा .... मौसी!! आप बेवजह परेशान हो रही है, कुछ नहीं होगा। नहीं.... बेटा! तू जानती नहीं, एक बार पी लेने के बाद वो बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते, की है कहाँ ..?? किससे क्या कह रहे है ...?? पर आप मौसी! एक बात बताइए, कि क्या आज तक उन्होंने आप पर हाथ उठाया, नहीं ... न! उसके लिए कभी मैंने उन्हें मौका ही नहीं दिया, किसी भी शादी या फंक्शन से आने के बाद मैं इन्हें बिस्तर पर लिटा कर इनके कपड़ो को सही करके और जूते वगैरह निकाल कर, लाइट बंद कर देती हूं और खुद बच्चों के कमरे में सो जाती हूँ। पहले तो वो पूछते भी थे कि मम्मी क्या हुआ ....?? आज आप अपने कमरे में क्यों नहीं सो रही ...?? फिर धीरे धीरे उन्हें भी सब समझ आने लगा। और अब वो भी ध्यान रखते हैं कि ये मुझसे किसी भी तरह का दुर्व्यवहार न करें। तो फिर चिंता किस बात की! हम बच्चे हैं .... न, आपका ख्याल रखने के लिए। मौसा जी का ध्यान रखने के लिए मैं मामाजी को कह देती हूं वें उन्हें आउट ऑफ कन्ट्रोल नहीं होने देंगे।।

राधा मौसी को एक सांत्वना मिल गयी थी , जिसके कारण वो अपनी सालो से दबी भावनाएं किसी को बता पायी थी। भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है ये कोई नहीं जानता था पर आज उनके दिल का बोझ काफी हल्का हो गया था। बाहर दरवाजे पर किसी की आहट हुई , रिंकी और राधा मौसी ने जल्दी से आंखों से बहते आंसुओं को पोंछ कर एक मुस्कुराहट ओढ़ ली।  और रात के किसी कलह क्लेश के बिना बीत जाने की कामना करने लगी।

©नेहाभारद्वाज

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