DOMESTIC VIOLENCE

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तन के घाव से भारी मन के घाव जिनकी पीड़ा न समझे कोई

Maneesha Gautam   886 views   2 weeks ago

कभी शारिरिक घाव मानसिक घाव को और गहरा कर देते है। तन के घाव को तो समय भर देता है,पर मन के घाव और गहरे होने लगते है। घाव ओर ज्यादा दुख देने लगते है जब समाने वाले को अपनी गलती का अहसास ही नहीं होता।

आखिर क्यों ...??

nehabhardwaj123   542 views   3 weeks ago

ये कहानी है राधा की जो अपने पति की शराब की आदतों से बहुत परेशान है

शादी के बाद का बर्थडे

kavita   1.08K views   1 month ago

संतान द्वारा माता पिता को खुश रखने की चाह ....अर्थात बच्चे बड़े हो गए ...! प्रेम, विवशता, और उनके अनकहे दर्द को दर्शाती एक लघु कथा

नन्हा कदम

rajmati777   525 views   2 months ago

एक ऐसी महिला की कहानी जिसे अपनी सुहागरात में क्या क्या करना पड़ा।सास ने बहू का वर्जिनिटी टेस्ट करवा उसे सदमे में डाल दिया।

498A कितना सफल कितना असफल

swati21   111 views   2 months ago

IPC 498A The most misuse law. आज तक सरकार भी इस कानून को सही अर्थो में लागू नहीं करा पाई है।

घर का मामला

varsha   410 views   2 months ago

आज के समय में जब हम अपने आसपास कुछ भी गलत होता देखकर भी आंखें मोड़ लेते हैं तो हम कैसे अपने लिए संवेदनशीलता की उम्मीद रख सकते हैं।

और मैं मुक्त हो गयी

kavita   502 views   2 months ago

शोषण के विरुद्ध एक स्त्री के आत्मबल संजो कर विद्रोह करने की मार्मिक कथा

साढ़े तीन ऑंखें

dhirajjha123   351 views   3 months ago

एक कहानी मानवीय प्रेम की, एक कहानी एक आम औरत की, एक कहानी एक माँ की

घरेलू हिंसा

nis1985   42 views   3 months ago

आज भी हमारे देश में न जाने कितने कमलू जैसे दरिंदे भरे पड़े है जो दारु पीकर अपनी औरतो को प्रताड़ित करते है बेटा न पैदा करने पे, ये घटिया मानसिकता अभी भी १००% ख़त्म नहीं हुई है

कभी कभी लड़की वाले भी दहेज के दोषी होते हैं

nehabhardwaj123   226 views   4 months ago

ये कहानी है चड्ढा साहब की जिन्होंने लड़के वालों के न चाहते हुए भी अपनी बेटी की दहेज दिया, पर दूसरी बेटी की शादी करने के समय आर्थिक स्थिति तंग हो चुकी थी।

Defence

ashwanikumartiwari3   9 views   4 months ago

It's a story thats best savoured when unfolded without having any prior information about it.

लघुकथा- रिश्तों की नीलामी

rashmi   283 views   4 months ago

पैसों से खरीदकर बनाए गए रिश्तें और उन पर हुकुमियत की दास्तां

घरेलू हिंसा: एक संकीर्ण सोच

utkrishtshukla   702 views   5 months ago

........हमें महिलाओं के प्रति अपनी संकीर्ण सोच बदलनी होगी और बाहर निकलना होगा ऐसी रूढ़िवादी परम्पराओं से जो उन्हें सम्मान व बराबरी का दर्जा नहीं दे सकती हैं।..........

A stamped on Rose

misswordsmith   125 views   5 months ago

A small article where I have tried to picturise the scenario of a woman facing domestic violence in both physical and mental form.

Men: The Perpetrators (A Reality or a Mindset)

abhinav   81 views   6 months ago

Violence against men do breathe in our very society. Men are always contemplated as perpetrators and women as sufferer.But is it always so?