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Real Story Of Acid Attack Survivor-Garima

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हमारे समाज में लगभग हर दिन एसिड अटैक की घटनाएं होती रहती हैं जिनमें कई लड़कियों के सपनों का खून हो जाता हैै। कुछ एक के हौसले टूटते हैं तो कुछ की जीवन प्रत्याशा ही छूट जाती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी सच्ची घटना बताने जा रहे हैं जहां लड़की के सपनों का खून तो हुआ लेकिन अपने साहस व हिम्मत के बल पर उसने अपने सपनों को फिर से बुना। अपनी जीने की इच्छा और NGO के साथ ने उसे एक नया जीवन प्रदान किया। हमें उम्मीद है, यह कहानी आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।

यह एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिस पर उस उम्र में एसिड अटैक हुआ जब वह महज 12 साल की थी। खेलने कूदने की उम्र में वह एक ऐसे हादासे से गुजरी जहां किसी की भी हिम्मत टूटना स्वाभाविक है। जिला फतेहपुर की रहने वाली गरिमा की वर्तमान उम्र 20 वर्ष है और अब वह स्नातक कर रही है और अपने सपनों को साकार करने की ओर अग्रसर है।


गरिमा की कहानी


रावतपुर, जिला फतेहपुर की रहने वाली गरिमा आज समाज के लिए एक मिसाल है। गरिमा के पिता श्री राकेश कुमार एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करते हैं और मां नीलम गृहणी हैं । घर में मां-बाप के अलावा एक छोटी बहन और एक छोटा भाई है। वह घर में अपने पापा की लाडली बिटिया है। सभी बच्चों की तरह वह भी प्रतिदिन अपनी सहेलियों के साथ स्कूल जाती और छुट्टी होने बाद उन्हीं के साथ खेलती-कूदती वापस घर आ जाती थी। वो अपने छोटे से संसार मे खुश थी। उसका खुशहाल परिवार इसी प्रकार अपने भविष्य की ओर आगे बढ़ रहा था।

गरिमा के अनुसार, “उसे बचपन से ही पुलिस की ड्रेस बहुत पसन्द है और वो एक पुलिस अफसर बनना चाहती है। हर बेटे-बेटी का सपना होता है कि वह अपने जीवन में ऐसा काम करे जिससे उसके मां-बाप को गर्व महसूस हो।" उसका सपना पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करना था। उसकी खुशहाल जिंदगी इसी तरह अपने सपनों की ओर बढ़ती जा रही थी। पर किसे पता था कि उसके सपनों को किसी की नजर लग जायेगी।

घटना 2008 की है जब वह 6ठाीं कक्षा में पढ़ती थी। हर दिन की तरह जब वह स्कूल से घर वापस लौट रही थी तब अचानक किसी अंजान व्यक्ति ने उस पर तेजाब फेंक दिया। तेजाब के असहनीय दर्द ने उसकी समझ को शून्य कर दिया। वह गिर पड़ी और जोर-जोर से चिल्लाने लगी। तेजाब की आग से उसका शरीर जलने लगा। तेजाबी धुएं ने उसके शरीर को ढक लिया। उसे नही पता था कि वह कौन था और उसने क्यूं उस पर तेजाब फेंका? उसका दर्द बढ़ता ही जा रहा था। लेकिन उसकी दर्द भरी चीखें सुनने वाला उसकी सहेलियों के अलावा कोई नहीं था। सभी सहेलियों की उम्र लगभग 12-13 वर्ष की ही थी। उन्हीं सहेलियों में से एक ने उसके पापा को बुलाया और हादसे की पूरी बात बताई। उसके पिता जल्दी से उसे पास के एक अस्पताल में ले गये। वहां उसका इलाज 5-6 माह तक चला।

शायद हमलावर उसके हौसलों पर तेजाब डालने में नकामयाब रहा। गरिमा की इच्छाशक्ति और उसके मजबूत इरादों ने उसकी जान तो बचा ली। लेकिन शायद अब उसे एक नया जीवन जीना सीखना था। इलाज के बाद हालत में सुधार आने लगा था। किसी को भी को यह विश्वास नही था कि अब गरिमा का जीवन पहले जैसे सामान्य होगा। उसने एक हिम्मत भरा कदम उठाया और ठीक होने बाद गरिमा ने फिर से स्कूल शुरू किया। स्कूली शिक्षा पूरी करने के पश्चात वह अब कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक कर रही है और अपने सपनों को साकार करने में लगी है।

गरिमा को अपनी जिन्दगी का वह वाकया भुलाए नहीं भूलता है। आज भी जब वह उस हादसे को याद करती है, तो उनका दिल भर आता है और वह रो पड़ती है। शायद वो र्दद अभी कहीं किसी कोने में जिन्दा है। गरिमा कहती है कि “जब मुझ पर तेजाब पड़ा तो ऐसा लगा कि किसी ने जैसे जलते आग के लावे को मुझ पर फेंक दिया हो। मैं जिन्दा जल रही थी जैसे। मुझे समझ नहीं आता उन बड़े-बड़े छालों और गहरे घावों के बीच मै जिन्दा कैसे थी?" गरिमा अभी भी खुद से यह सवाल पूछां करती है कि “मैने किसी का क्या बिगाड़ा था? मेेरी किसी से क्या दुश्मनी थी? मै तो स्कूल जाने वाली एक छोटी सी बच्ची थी।“ वो कहती है कि “मुझे अधिक दुख इस बात का है कि जिसने मुझ पर तेजाब फेंका, वह गुनाहगार आज भी खुले आम घूम रहा है। उसे सजा न मिल सकी।" आगे वो कहती है कि “मुझे इस बात का भी डर लगा रहता है कि वह हमलावर फिर से किसी के साथ ऐसा न कर दे।"

इतने साल उस खौफनाक यादों के साथ गुजारे हर लम्हें में गरिमा को लगता था कि उसके सपने अब कभी सच नही होंगें। लेकिन "Sheroes Cafe" का हिस्सा बनने के बाद उसकी सोच बदल गई। और अब वह फिर अपने सपनों के लिए जीना चाहती है। एक दिन "Sheroes Cafe" की सदस्य प्रीति के पिता, गरिमा के पिता से मिले और उन्हें "Sheroes Cafe" के बारे में बताया और गरिमा 1-9-2016 को "Sheroes Cafe" का हिस्सा बन गई।

"Sheroes Cafe " का हिस्सा बनने के बाद

गरिमा कहती है कि “यहां शामिल हाने के बाद वो आत्मनिर्भर बनीं और अपने परिवार को भी सहयोग प्रदान कर रही है। "Sheroes Cafe" का हिस्सा बनने के बाद वो बहुत खुश है हमले के बाद उसने कभी नहीं सोचा था कि उसे वो सब कुछ फिर से मिलेगा जो वो शायद खो चुकी थी। यहां उसकी जैसी और भी ACID ATTACK SURVIVORS हैं जो अपना जीवन आत्मविश्वास के साथ से जी रही हैं । सब एक दुसरे को समझते हैं और यहां एक परिवार की तरह रहते हैं।“

आज "Sheroes Cafe" ने गरिमा जैसी और भी पीड़ितो के सपनों को फिर से जिंदा कर रखा है। गरिमा के एक हिम्मती कदम ने उसकी जिन्दगी को फिर से नई रोशनी दी। अपने परिवार और शिरोज के सहयोग के कारण अब गरिमा बेहतर जीवन जी रही है ओैर अपने भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच अपनाये हुए है।

यह कहानी Chhanv Foundation के द्वारा साझा की गयी है। DAWRITER COMMUNITY मानवता के ख़िलाफ़ हो रही इस प्रकार की हिंसक घटनाओं का पुरजोर विरोध करती है।

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