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@dawriter

तेज़ाब

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suryaa by  
suryaa

प्यार करता हूँ तुमसे ,कितनी बार बोला है मान जाओ वरना बहुत गड़बड़ होजायेगी.......राघव गुस्सैल होते हुए बोला लेकिन मैं नहीं करती ना......मुझे इन चक्करों में नहीं पड़ना और सुनो मेरी बेस्ट फ्रेंड के भाई हो इसीलिए तुम्हारी नौटंकी देख रही हूँ वरना अब तक थप्पड़ खा चुके होते तो मार दो ना थप्पड़ .....कहते हुए राघव ने अपर्णा का हाथ पकड़ लिया |

अब अपर्णा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था....लेकिन प्रिया(राघव की बहन) की वजह से उसने राघव को कुछ नहीं कहा
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यार तेरा भाई तो एकदम पागल हो गया अब उसकी हरकतें काफ़ी बढ़ चुकी हैं अबतक मैं तुम्हारी वजह से कुछ नहीं बोल रही थी अब बहुत हुआ अब अंकल को बताना पडेगा उसके बारे में ---तू चिंता मत कर कल मैं माँ से बात करुँगी ,पापा को पता चल गया ना तो मार डालेंगे उसे.....मैं माँ से बात कर लूँगी तू बेफिक्र रह ......कहकर प्रिया ने फ़ोन काट दिया |

दूसरे दिन----


राघव यहाँ आओ क्या हुआ माँ? तू अपर्णा को क्यों परेशान कर रहा है ......अब तेरी हरकतें इतनी गिर चुकी हैं .....बहुत हुआ अगर अगली बार उसे कुछ बोला तो पापा को अपने जवाब देना.......इसी बीच ----माँ मैं कॉलेज जा रही हूँ .....ओके बेटा जाओ और हाँ अपर्णा से सॉरी बोल देना इसकी हरक़त के लिए ओके माँ .....कहकर वो वहां से चली गयी फिर---तमीज़ में रहो और लड़कियों की रेस्पेक्ट करना सीखो और ये भी जान लो की एक बहन तुम्हारे भी है.....अपर्णा एक लड़की के साथ साथ तुम्हारे बहन की दोस्त
भी है ......माँ ने उसे कसकर लताड़ लगाते हुए कहा।


राघव का पारा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था वो गुस्से से पागल हो गया था......वहाँ से सीधा वो शराब की दुकान पर पहुँचा वहां दारू पी और दुकान से तेज़ाब ख़रीद कर कॉलेज के गेट पर अपर्णा के आने का वेट करने लगा....... तभी उसे दूर से स्कूटी पर मुहँ पर दुप्पटा बांधे अपर्णा आते हुए दिखी.........जैसे ही उसने कॉलेज के गेट पर स्कूटी खड़ी करके घूमी राघव ने तुरन्त एसिड भरी बोतल उसके चेहरे पर दे मारी .....स्कूटी वाली लड़की अपने झुलसते हुए चेहरे पर से दुप्पटा हटाते हुए बोली "भैया ये क्या किया आपने".........प्रिया की आवाज़ सुनकर राघव एकदम जड़वत रह गया .....लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था प्रिया का 80 फ़ीसदी शरीर झुलस चुका था वो तुरन्त लेकर उसे हॉस्पिटल की तरफ़ भागा........


1 घण्टे पहले----माँ मैं कॉलेज जा रही हूँ .....ओके बेटा जाओ और हाँ अपर्णा से सॉरी बोल देना इसकी हरक़त के लिए ओके माँ ......यार तू टेंशन मत ले मैंने माँ को बोल दिया है उन्होंने उसकी क्लास लगा दी है अब वो तुम्हें परेशान नहीं करेगा ---ओके थैंक्स यार ज्यादा हो गया था इसलिए मैंने बोला ,चलो छोडो वैसे क्या लोगी चाय या कॉफी---कुछ नहीं मैंने नाश्ता कर लिया है---ओके मैं भी कर लूँ फिर निकलते हैं....जैसे ही वो कॉफी लेकर आगे बढ़ी फिसलने की वजह से सारी कॉफ़ी प्रिया के कपड़ों पर गिर गयी---ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्........सॉरी--कोई नहीं यार कोई अपनी दे दे मैं चेंज कर लूँगी वैसे थोड़ा गर्म कॉफ़ी पिया कर......वो मुस्कुराते हुए बोली रास्ते में----अपर्णा के फ़ोन की घण्टी बजी---हाँ पापा बोलो---बेटा क्या तुमने पैसे दे दिए थे अंकल को अपने ?--नहीं पापा मुझे देर हो गयी है मैं कॉलेज से आकर दे दूँगी---बेटा आज तुम्हारे आंटी की दवा लानी होगी तुम कॉलेज बाद में जाना पहले उनको पैसे दे आओ ---ठीक है पापा जैसा आप कहो ......बाय .....कहकर उसने फ़ोन काट दिया --यार प्रिया तुम स्कूटी लेकर
चली जाओ मैं अंकल को पैसे देकर कॉलेज आती हूँ ---तुम स्कूटी ले जाओ मैं बस से निकल जाऊंगी --अरे नहीं यार इतनी दूर स्कूटी से कौन जायेगा तुम जाओ मैं दो घण्टे बाद वहीं मिलती हूँ |
--ओके बाय
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उसके दोनों आँखों की रौशनी चली गयी है अब वो कभी नहीं देख पायेगी ,आई ऍम सो सॉरी सर........डॉक्टर ने मास्क उतारते हुए राघव के पापा से कहा---मिस्टर राघव यू आर अंडरअरेस्ट ,आते ही पुलिस वाले ने उससे कहा......एक साथ दोनों बच्चों की ज़िन्दगी बर्बाद होते देख राघव के पापा को हार्ट अटैक आया और लाख कोशिशों के बाद भी चल बसे .....कुछ दिनों बाद प्रिया ने भी आत्महत्या कर ली .....एक साथ इतने ग़म और एकाकी को राघव की माँ भी नहीं बर्दाश्त कर पायीं और एक दिन वो अपने घर में मृत पायी गयीं......
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आजकल राघव पागलखाने में है और अपर्णा अपनी पढाई पूरी करके एक कंपनी में मैनेजर.....इस कहानी के अंत में मैं कहना चाहूँगा इश्क़ करो तो इश्क़ जैसा करो.....ना की जबरदस्ती भगवान् बिगड़ा तुम पर तो मिट जायेगी तुम्हारी हस्ती

सीख -- कहते हैं ऊपरवाला जल्दबाज़ी में कोई फैसला नहीं लेता है लेकिन जब लेता है तो इतने कठोर फैसले ले लेता जो शायद हमारे इंसानी दिमाग से परे होता है | राघव ने जबरदस्ती प्यार करने के चक्कर में अपने साथ अपनी बहन की ज़िन्दगी बर्बाद की और तीन मौतों का जिम्मेदार भी बना | आजकल प्यार में फेल हुए लड़के लड़कियों पर एसिड अटैक और जबरदस्ती सम्बन्ध जिसे हम आम भाषा में बलात्कार कहते हैं जैसे घिनौने और गैरकानूनी कृत्य करते हैं जो ना तो हमारे समाज को स्वीकार होता है ना ऊपर वाले की अदालत में इन सबसे बचने का एक मात्र जरिया है अपने बच्चों को स्त्रियों की इज़्ज़त करना सिखाना क्योंकि हम उन्हीं से पैदा हुए हैं अगर उनकी इज़्ज़त नहीं करेंगे तो हमें बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता यहाँ तक खुद भगवान भी "यत्र नारिस्त पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता"

हमें इस कहावत को केवल कहावत नहीं चरितार्थ भी करना है क्योंकि जिस जहाँ में स्त्री का सम्मान होता है उस जहाँ का सम्मान लोग खुद बा खुद करने लगते हैं इस कहानी के माध्यम से मैंने बस यह समझाने की कोशिश की है स्त्री को अपना अधिकार और हक़ ना समझें , अगर राघव ने अपर्णा को अपना हक़ ना समझकर एक सच्चे प्रेमी जैसा व्यवहार करते हुए उसे अपना बनाने की कोशिश करता तो शायद वो उसे मिल भी जाती और उसके परिवार के साथ जो अत्यंत दुःखद घटना घटी वो भी ना होती ....... बदलते हुए सामाजिक परिवेश को समझिये और दिल जीतने की कोशिश करिये शरीर नहीं

सूर्या शुक्ला
-----------***समाप्त**--------------

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