Nidhi Bansal

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जब दीप जले दीवाली के

केवल घर मे रौनक ना हो,चेहरा भी खुशियों से भर जाये,आये कोई दीवाली ऐसी,मजबूरी भी डर जाये

अटल हूं मै अटल ही रहूंगा

अंतिम क्षणों मे अटल जी के विचारों की परिकल्पना

अब तो धरा बचाने को हम एक हो जायें

जो पालन करती है हमारा उसका अस्तित्व बचाना है,अब अपनी धरा बचाने को हमे एकजुट हो जाना है।

इतनी हिम्मत कहां से लाती हो

प्रतिलिपि काव्य प्रतिस्पर्धा मे top 10 मे से8th no.पर रही मेरी ये कविता मां तुम अद्भुत हो,अदम्य साहस की थाती हो जो दुनिया में कर ना सके कोई बस तुम ही कर पाती हो

मै नारी हूं

स्त्री अदम्य साहस की गाथा है परिभाषा है। स्त्री नहीं अंधियारा कभी,ये उजले कल की आशा है।

होली के रंग

होली की मस्ती होली के रंग आओ मनाये होली खुशियों के संग

चलो कुछ पल ठहर जाते हैं

अतिव्यस्त और भागमभाग भरी जिदंगी में बहुत कुछ पीछे छोङते जा रहे है। कभी उन चीजों को भी समय देना आवश्यक है

आसमान तो दो

आज खबर मिली की एक छात्रा ने छेड़छाड़ से दुःखी हो कर आत्मदाह कर लिया।मन के आक्रोश को शब्दों का रूप दे दिया।मुझे मालूम है कुछ बदलने वाला नहीं यहां फिर भी एक छोटी सी कोशिश,मेरे शब्द की।

लगता है

जब हम किसी को दिल से चाहते है, हमे फरक नही पड़ता कि जमाना उसके लिये क्या सोचता है

बड़ी तकलीफ होती है

माँ के आँचल की छाँव बमुश्किल नसीब होती है एक माँ ही तो है जो दिल के करीब होती है

नव वर्ष की बेला आई

नया साल,नयी उम्मीदों और नये जोश के साथ आये यहीशुभकामनाएं है।

ए जिदंगी

हमेशा क्यो जिदंगी की सुने क्यों उसके हिसाब से चलें। आओ आज कुछ बातें जिदंगी के साथ करते है।आज अपनी खाली झोली में कुछ तारें और महताब भरतें है।।

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